यह मार्च पार्टी के दो नेताओं श्री आशुतोष रांका और श्री सौरव दास की गिरफ्तारी के विरोध में है, जिन्हें बिना इजाज़त जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। श्री दिपके ने नागरिकों से अपील की कि वे 16 अक्टूबर शुक्रवार शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज के साथ इकट्ठा हों।
उन्होंने इसी तरह सभी से अपने-अपने शहरों में मार्च आयोजित करने का आह्ववान किया है। यह दावा करते हुए कि पार्टी नेताओं श्री सौरव दास और श्री आशुतोष रांका को सिर्फ तिरंगा फहराने के लिए जेल भेजा गया, श्री दिपके ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने को अपराध नहीं माना जा सकता।
उन्होंने सोशल मीडिया पर यह आशंका भी जताई कि विरोध-प्रदर्शन के आह्वान के कारण उन्हें खुद भी जेल जाना पड़ सकता है।
इन गिरफ्तारियों की कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है, जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन और केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस का हालांकि कहना है कि यह कार्रवाई शांति समझौते के उल्लंघन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के कारण की गई। गौरतलब है कि यह मामला 13 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है, जब श्री दास, श्री रांका और उनके सहयोगी श्री अजिंक्य शिंदे उन 14 सीजेपी सदस्यों में शामिल थे, जिन्होंने सुरक्षा बैरिकेड्स पार किए और जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश किया।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर उनके इस्तीफे की मांग की। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के परिसर में घुस गए और कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोका। सोमवार 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की अधिकृत जगह के तौर पर दी गई मान्यता रद्द कर दी गई थी।
सीजेपी का कहना था कि उसके सदस्यों ने विरोध-प्रदर्शन की जगह और प्रदर्शन करने का अपना अधिकार फिर से हासिल कर लिया है और उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन के केंद्र में राष्ट्रीय ध्वज ही रहा है।
