शहर में बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट नाराज

इंदौर:शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था, जर्जर सड़कों और निर्देशो में लापरवाही को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है. हाईकोर्ट में ट्रैफिक सिग्नलों के बीच समन्वय की कमी, यातायात पुलिस बल के रिक्त पद, पार्किंग की अपर्याप्त व्यवस्था और खराब सड़कों सहित कई मुद्दों पर सुनवाई हुई.आज हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की डबल बेंच में राजलक्ष्मी फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान नगर निगम, यातायात पुलिस और प्रशासन सहित संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है.

याचिकाकर्ता अजय बागड़िया ने कोर्ट को बताया कि 92 सिग्नलों में से सिर्फ 28 सिग्नल इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े हैं. इनमें 58 स्मार्ट सिटी और 34 नगर निगम के अधीन हैं. न्यायालयीन कार्यवाही में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, यातायात पुलिस के 881 स्वीकृत पदों के मुकाबले 660 पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं. वहीं यातायात पुलिस के 221 पद खाली हैं. पुलिस बल की कमी से प्रमुख चौराहों, व्यस्त मार्गों और व्यापारिक क्षेत्रों में यातायात नियंत्रित करने में परेशानी आती है. अधिवक्ता बागड़िया ने शहर के 40 प्रवेश मार्गों पर हाइड्रोलिक बैरियर लगाने का सुझाव दिया, जिससे भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. उक्त स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों को शहर के अंदर महत्वपूर्ण चौराहों और व्यस्त मार्गों पर लगाया जा सकता है.

सुनवाई में 311 एप पर दर्ज शिकायतों में सड़कों की खराब स्थिति और गड्ढों की मरम्मत में देरी का मुद्दा भी उठाया गया. सुनवाई में तर्क दिया गया कि नागरिकों की शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध होने से समस्या का समाधान नहीं हो जाता है. शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और यह भी स्पष्ट करें कि कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया तथा अभी कितनी भी लंबित हैं. हाईकोर्ट को विजय नगर से देवास नाका तक खराब सड़क की जानकारी दी गई.

बताया गया कि प्रस्तावित फ्लाई ओवर निर्माण के कारण सड़क के मध्य हिस्से में खुदाई और बैरिकेडिंग की गई है. सड़क किनारे के हिस्से गड्ढे, धूल, कंकड़-पत्थर और निर्माण मलबा होने से वाहन चालकों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए परेशानी और दुर्घटना का खतरा बन गए हैं. याचिकाकर्ता ने पार्किंग की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इंदौर में सिर्फ 26 पार्किंग स्थल है. वहीं नागपुर में 51, कानपुर में 42 और लखनऊ में 62 पार्किंग स्थल है. अगली सुनवाई में यातायात व्यवस्था सुधार की योजना बनाने के लिए अधिवक्ता राहुल सेठी को समन्वयक नियुक्त करने की मांग की ग

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