श्रीमती सीतारमण ने वैश्विक उद्योग-व्यापार जगत का प्रतिनिधित्व करने वाले कंपनी सीईओ के इस समूह के साथ आयोजित गोलमेज बैठक में भाग लिया। वित्त मंत्रालय ने कहा, ” इस बैठक में वैश्विक व्यापार जगत के प्रमुख नेताओं के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-राजनीति और वैश्विक निवेश प्रवाह के बीच बदलते संबंधों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही, भारत में बुनियादी ढाँचे, विनिर्माण, ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।”
मंत्रालय के अनुसार बैठक में शामिल निवेशकों ने भारत की विकास संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया और कहा कि वे भारत के साथ निरंतर आर्थिक सहयोग बनाए रखने के लिए उत्सुक हैं।
चर्चा में आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण के अध्यक्ष के. राजारमन तथा राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव अग्रवाल ने भी भाग लिया। श्रीमती सीतारमण ने इस कार्यक्रम में अलग से एक संवाद में विदेशी पूंजी प्रवाह के मुद्दे पर कहा कि इस समय पूंजी ‘अमेरिका और मुख्य एआई ( कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की परियोजनाओं की ‘ की ओर जा रही है और इससे भारत ही नहीं और भी अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, ” इस समय फ्रंटियर एआई (अग्रिम पंक्ति के एआई कारोबार का) आकर्षण हैं। इस मामले में फिलहाल भारत जरूर छूट रहा है, पर हम कंपनियों और इकाइयों को एआई अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि एआई की प्रौद्योगिकी के जरिए सशक्तीकरण के लिए भी धन की जरूरत होती है। भारत इसके लिए पूंजी का प्रबंध कर रहा है। उन्होंने इस सुझाव से असहमति जताई कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन व्यावहारिक नहीं है। वित्त मंत्री ने कहा यह जरूर है कि भारत अभी फ्रंट लाइन की क्षमता के चिप न बना रहा हो, लेकिन देश में इस समय जो चिप बनाए जा रहे हैं, उनकी फ्रिज, कार इंटरनेट ऑफ दी थिंग्स (आईओटी) जैसे क्षेत्र में बड़ी मांग है, लेकिन देश की सूक्ष्म चिप की क्षमता की ओर भी बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि एआई और डाटा सेंटर के लिए बिजली की उपलब्धता बहुत महत्वपूर्ण है। भारत में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन, हरित ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और ईवी क्षेत्र में पूंजी निवेश हो रहा है जो देश की आर्थिक वृद्धि को गति दे रहा है।
