विकास और रोजगार चाहिए लेकिन रेडिएशन नही चाहिए

विंध्य की डायरी

डा. रवि तिवारी

रीवा जिले के सिरमौर तहसील के अन्तर्गत सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध लगातार जारी है. एक तरफ जहां प्रदेश सरकार और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला इसे विंध्य क्षेत्र के लिये ऐतिहासिक सौगात और देश का पहला निजी न्यूक्लियर पावर प्लांट बता रहे है वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता अपनी सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर लामबंद है. दोनों पक्षों के बीच हुई हालिया बैठके पूरी तरह बेनतीजा रहीं. एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक और टाटा कम्पनी के प्रतिनिधि पुलिस बल के साथ भू तकनीकी जांच और बोरहोल टेस्टिंग का काम शुरू करने पहुंचे तो हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर काम रूकवा दिया. जिसके बाद प्रशासन को काम स्थगित कर पीछे हटना पड़ा. दरअसल ग्रामीणों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डऱ है कि परमाणु संयंत्र से निकलने वाले संभावित रेडिएशन (विकिरण) और कचरे उनके स्वास्थ्य, खेती, जलस्त्रोतों और आने वाली पीढिय़ों के भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा. लगातार ग्रामीण विरोध कर रहे है. पंचायत द्वारा कथित जारी एनओसी को लेकर भी निष्पक्ष जांच की मांग की है. पावर प्लांट के विरोध में लगातार ग्रामीण है उनका नेतृत्व किसी राजनीतिक दल के नेता द्वारा नही किया जा रहा है. ग्रामीण खुद अपनी जमीन, पर्यावरण, भविष्य को लेकर विरोध के मुहाने पर खड़े है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि वो विकास और रोजगार के विरोधी नही है, लेकिन परमाणु बिजली घर के जगह क्षेत्र में कोई अन्य सुरक्षित उद्योग स्थापित करने का विकल्प चाहते है.

ओबीसी नेताओं के अपने-अपने आरोप

पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत किये जाने वाले 2019 के संशोधित कानून और अध्यादेश को उच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है. जिसके बाद से कांग्रेस और भाजपा के बड़े ओबीसी नेता एक दूसरे की पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे है और एक नई बहस को जन्म दे दिया है. संसद की अन्य पिछड़ा वर्गो की कल्याण संबंधी समिति के अध्यक्ष व सांसद गणेश सिंह ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि 14 प्रतिशत से बढाकर 27 प्रतिशत का आरक्षण देने का जो अध्यादेश जारी किया गया था वह पिछड़े वर्ग को गुमराह करने का एक सुनयोजित षडय़ंत्र था. इसीलिये न्यायालय ने उसे अमान्य कर दिया. कांग्रेस की गलत नीतियों की सजा आज पिछड़ा वर्ग भुगत रहा है. उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद राजमणि पटेल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने न्यायालय में सही ढंग से पैरवी नही की, जिसका परिणाम सबके सामने है और अब सरकार पिछड़ो की हमदर्दी हासिल करने कोर्ट जाने की बात कर रही है. लेकिन भाजपा की अंदुरूनी नियत आरक्षण लागू करने की नही है.

सत्ताधारी विधायक ने जब दिखाया आइना

जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये सेवा सेतु शिविर दूसरे शब्दों में कहें जन समस्या निवारण शिविर लगाए जा रहे है. ऊर्जाधानी के मोरवा जोन में लगाये गये शिविर में चंद लोगों को देख सत्तादल के विधायक रामनिवास शाह भडक़ गये और फिर अफसरों को नसीहत देते हुए आइना ही नहीं दिखाया बल्कि खरीखोटी भी सुनाई. विधायक ने सख्त लहजे में कहा काम नही करना है तो अवकाश लेकर चले जाएं. दरअसल उनका निशाना कलेक्टर और ननि आयुक्त पर था. जनता का काम नही होता उनकी समस्याओं का निराकरण नही किया जाता. यही वजह है कि ऐसे शिविर से लोग कतराने लगे है. शिविर के नाम पर जो फोटो सेशन और खानापूर्ति चल रही है विधायक ने उसकी पोल खोल कर रख दी. इसके पूर्व भी देवसर विधानसभा के गन्नई ग्राम पंचायत में सेवा संकल्प शिविर के दौरान स्थानीय ग्रामीणों के आक्रोश का सामना अफसरों को करना पड़ा था. कुछ ऐसा ही हाल चितरंगी के बमदरा में देखने को मिला था. कुल मिलाकर शिविर केवल खानापूर्ति तक सीमित रहे गये है. यही वजह है कि जनता और जनप्रतिनिधियों का आक्रोश देखने को मिल रहा है.

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