लंदन, 13 अक्टूबर (वार्ता) ईरान ने मंगलवार को ब्रिटेन के उन आरोपों का खंडन किया कि वह आरएएफ फेयरफोर्ड में हुई सुरक्षा से जुड़ी घटना के पीछे था। आरएएफ फेयरफोर्ड एक ब्रिटिश सैन्य अड्डा है जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है। यह आरोप तब लगाया गया जब प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि इसकी ‘बहुत संभावना’ है कि इस घटना की योजना ईरान में बनायी गई थी और ‘संभवतः निश्चित रूप से’ यह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा निर्देशित था।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के उन आरोपों की निंदा की और आरोपों को बेबुनियाद बताया। मंत्रालय ने तर्क दिया कि ‘बहुत संभावना’ और ‘संभवतः निश्चित रूप से’ जैसे शब्द अस्पष्ट भाषा है जिसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने ब्रिटिश सरकार से आरोपों को साबित करने के लिए कहा है। श्री बर्नहम ने सोमवार को ब्रिटिश संसद के निचले सदन में कहा था कि 27 सितंबर की घटना में ईरान की संलिप्तता के संबंध में ब्रिटेन के पास मजबूत संकेत हैं। इस घटना के बाद दक्षिण-पश्चिमी इंग्लैंड स्थित सैन्य अड्डे पर बड़े पैमाने पर सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था और अमेरिकी बी-1 बमवर्षक विमानों को वहां से वापस बुला लिया गया था।
श्री बर्नहम ने कहा, “मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि बहुत संभावना है कि इसे ईरान में समन्वित किया गया था और संभवतः निश्चित रूप से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इसे निर्देशित किया था। हम अपनी ज़मीन पर ऐसी धमकियां बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ब्रिटिश सरकार ने इस घटना को लेकर ईरान के राजदूत अली मौसावी को तलब किया जबकि विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने विरोधी गतिविधियों में मदद करने के आरोपी दो ईरानी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। श्री मिलिबैंड ने कहा कि इन उपायों में संपत्ति ज़ब्त करना, यात्रा पर रोक और कंपनी निदेशक के रूप में काम करने से अयोग्य ठहराना शामिल है।
ब्रिटेन ने जिन दो व्यक्तियों की पहचान की उनमें रूहोल्लाह बाजघांडी शामिल हैं जिन्हें ईरान के आईआरजीसी में जासूसी रोधी अभियानों का प्रमुख बताया गया है। दूसरे का नाम शाहराम अली रजा तामरजादेह जक्की है जिस पर ज़िंदाश्ती आपराधिक गिरोह के लिए मददगार के रूप में काम करने का आरोप है। श्री बर्नहम ने कहा कि ब्रिटेन ईरान पर और प्रतिबंध लगा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आपराधिक नेटवर्क और उनके वित्तपोषण के स्रोतों को निशाना बनाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेगी।
उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर को आरएएफ फेयरफोर्ड के पास आतंकवाद एवं विस्फोटक से जुड़े अपराधों के शक में पांच ब्रिटिश नागरिकों को गिरफ़्तार किया गया। बाद में उन्हें कड़ी शर्तों के साथ ज़मानत पर रिहा किया गया जबकि कुछ दिनों बाद एक और गिरफ़्तारी हुई। शुरुआती रिपोर्टों से पता चला कि जांचकर्ताओं को गाड़ियों में पेट्रोलियम जैसे ज्वलनशील पदार्थ मिले, हालांकि विस्फोटक से जुड़ी किसी कथित साज़िश की संभावना स्पष्ट नहीं थी। इस घटना के बाद आरएएफ फेयरफोर्ड से अमेरिकी बी-1 बमवर्षक विमानों को हटा लिया गया, जबकि बी-52 बमवर्षक विमान सैन्य अड्डे पर ही रहे।
इसके अलावा, 29 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी करके ईरान की हिंसक गतिविधियों की निंदा की। इन गतिविधियों में उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ जानलेवा साजिशें, आगजनी, तोड़-फोड़, साइबर हमले और अन्य शत्रुतापूर्ण कार्य शामिल थीं। इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और आयरलैंड शामिल थे।

