बांस से स्वरोजगार के लिए समन्वित प्रोजेक्ट बनाएं: श्रीमती देशमुख

रीवा:कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में बांसशिल्प के विकास के लिए विचार मंथन किया गया. बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा ने कहा कि रीवा जिले में प्राकृतिक रूप से बांस का अच्छा उत्पादन होता है. बांस इमारती लकड़ी का अच्छा विकल्प है. पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बांस का उपयोग बहुत लाभकारी है. बांस का एक बार रोपण करने के बाद केवल चार-पाँच साल तक ही देखभाल की आवश्यकता होती है. इसके बाद नाममात्र की देखरेख में लगभग 40 सालों तक इससे बांस प्राप्त होता रहता है. बांस के सुंदर और आकर्षक बर्तन तथा सजावटी सामान बनाकर हजारों लोगों को रोजगार दिया जा सकता है. रीवा में बांसशिल्प के विकास और स्वरोजगार को लेकर समन्वित कार्ययोजना बनाएं. इसमें ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामोद्योग, पर्यटन विकास निगम, औद्योगिक विकास निगम तथा वन विभाग को शामिल करें.
बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि दलित इंडियन चेम्बर्स ऑफ कामर्स इंडस्ट्री बांसशिल्पियों को प्रशिक्षण देने आवश्यक तकनीकी तथा मशीनें उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना बनाए. पूरे जिले में बांसशिल्पियों के सर्वेक्षण तथा बांस उत्पादन की जानकारी के लिए भी प्रयास आवश्यक है. स्वरोजगार के लिए जिले में शुरूआत में एक क्लस्टर बनाकर इसे प्रमोट किया जाएगा. प्रशिक्षण के लिए भवन तथा इसमें रूचि रखने वाले स्वरोजगारियों की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. प्रोजेक्ट रिपोर्ट में सभी आयामों को शामिल करें, जिससे बांसशिल्पियों को आर्थिक विकास का अवसर मिलने के साथ बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन हो.
बैठक में दलित इंडियन चेम्बर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष डॉ. अनिल सिरवैया ने बताया कि हरदा जिले में बांस बर्तन और सजावटी सामग्री बनाने का प्रोजेक्टर सफलतापूर्वक चल रहा है. इसमें 1200 से अधिक स्वरोजगारियों को प्रशिक्षण और आधुनिक मशीनें देकर जोड़ा गया है. मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम भी बांसशिल्प को बढ़ावा देने के लिए सहयोग कर रहा है. रीवा जिला में एक जिला-एक उत्पाद में भी बांस शामिल है. रीवा जिले में बांसशिल्पियों का सर्वेक्षण करके प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा. हमारा संस्थान प्रशिक्षण तथा विपणन में सहयोग करेगा. रीवा ही नहीं संभाग के सभी जिलों में बांसशिल्प के विकास का अच्छा स्कोप है. बांस से बनी सामग्री मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ अन्य उत्पादों की तुलना में सस्ती भी है. बैठक में बांस के माध्यम से स्वरोजगार के विकास, प्रशिक्षण तथा उत्पादित वस्तुओं के विपणन के संबंध में चर्चा की गई. बैठक में कार्यकारी निदेशक औद्योगिक विकास निगम यूके तिवारी ने बांस शिल्प के प्रोजेक्ट निर्माण के संबंध में उपयोगी सुझाव दिए. बैठक में उद्योग, आजीविका मिशन, वन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और डीआईसीसीआई के प्रतिनिधि डॉ. मोनिका जैन, डॉ. राजीव जैन, स्नेहिल आर्या उपस्थित रहे.

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