इंदौर: वन विभाग के वेस्टर्न जोन में वन्यजीवों के इलाज की व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं. लंबे इंतजार के बाद विभाग को पशु चिकित्सक मिल गया है. अब घायल और बीमार वन्यजीवों के रेस्क्यू के दौरान चिकित्सक भी टीम के साथ मौके पर पहुंच रहे हैं. वहीं, इलाज के लिए अब तक चिड़ियाघर के एनिमल हॉस्पिटल पर निर्भर रहने वाले वन विभाग ने खुद का अस्पताल बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने की कवायद शुरू की है. प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाएगा, ताकि वन्यजीवों के उपचार के लिए विभाग के पास अपनी व्यवस्था हो सके.
रालामंडल अभयारण्य बनने के बाद से ही वन विभाग को अपने पशु चिकित्सक की जरूरत महसूस हो रही थी. अब तक रेस्क्यू में घायल होने वाले वन्यजीवों और बीमार जानवरों के इलाज के लिए चिड़ियाघर के एनिमल हॉस्पिटल की मदद लेनी पड़ती थी. इसके लिए चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव से सहयोग लिया जाता रहा है. ऐसे में वन विभाग के साथ ही चिड़ियाघर के चिकित्सकों पर भी काम का दबाव रहता था. वेस्टर्न जोन के विभिन्न जिलों में वन्यजीवों के रेस्क्यू और उपचार की जरूरत को देखते हुए रीजनल टाइगर स्ट्राइक फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी रितेश सरोठिया ने भोपाल मुख्यालय को पशु चिकित्सक की पदस्थापना के लिए प्रस्ताव भेजा था. इसके बाद हाल ही में डॉ. निखिल को यहां पदस्थ किया है.
घायल वन्यजीवों को मौके पर ही मिल रहा प्राथमिक उपचार
पशु चिकित्सक की पदस्थापना से अब वन विभाग को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ही विशेषज्ञ की मदद मिल रही है. घायल वन्यजीवों को मौके पर प्राथमिक उपचार देने और उनकी स्थिति के अनुसार आगे की व्यवस्था करने में आसानी होगी. इसका फायदा इंदौर के आसपास के जंगलों के साथ वेस्टर्न जोन के दूसरे जिलों को भी मिलेगा. हाल ही में बुरहानपुर क्षेत्र में भालू के रेस्क्यू के दौरान चिकित्सक टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे. हालांकि, फिलहाल वन्यजीवों के इलाज के लिए विभाग के पास अपना अस्पताल और पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. जरूरत पड़ने पर जानवरों को चिड़ियाघर के एनिमल हॉस्पिटल ले जाना पड़ रहा है.
अस्पताल के लिए मुख्यालय भेजेंगे प्रस्ताव, डीएफओ…
डीएफओ सुधाकर लाल ने नव भारत को बताया कि पशु चिकित्सक मिलने से रेस्क्यू किए जाने वाले घायल और बीमार वन्यजीवों के उपचार में राहत मिलेगी. चिकित्सक रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर भी जा रहे हैं. विभाग अब अपना एनिमल हॉस्पिटल बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजेगा. इससे वन्यजीवों के इलाज के लिए जरूरी संसाधन और व्यवस्थाएं विभाग के स्तर पर विकसित की जा सकेंगी. फिलहाल पशु चिकित्सक रालामंडल में बैठ रहे हैं और उपचार के लिए चिड़ियाघर के एनिमल हॉस्पिटल की मदद ली जा रही है
