जबलपुर:बालाघाट जिले के बैहर-बिरसा क्षेत्र में बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बच्चों की मौत, कुपोषण और संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची व न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को गंभीर बताते हुए बच्चों की मौत पर चिंता जताई है, दरअसल याचिका बालाघाट निवासी अजब लाल लिल्हारे ने दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बहुल दूरस्थ क्षेत्रों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं, समय पर टीकाकरण, पौष्टिक आहार और बीमारी की समय रहते पहचान व उपचार की व्यवस्था में गंभीर कमियां हैं। याचिकाकर्ता ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, बच्चों को सुरक्षित पेयजल और पोषण उपलब्ध कराने तथा मौतों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है। याचिका में मध्यप्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में भी बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है।
45 मौतों के दावे और 32 की प्रशासनिक पुष्टि में अंतर
बालाघाट के बिरसा क्षेत्र के गांवों और मंझरे टोलों में बच्चों की मौतों को लेकर आंकड़ों में अंतर सामने आया है। कांग्रेस का दावा है कि करीब चार माह में 45 बच्चों की मौत हुई है, जबकि प्रशासन ने अब तक 32 मौतों को स्वीकार किया है। एक अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रभावित गांव जगला का दौरा किया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कुछ बच्चों की मौत प्रशासनिक आंकड़ों में दर्ज नहीं की गई है। मौतों के कारणों, बीमारीवार विवरण और सभी मामलों की आधिकारिक पुष्टि के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।
हाईकोर्ट में भी लंबित है मामला
बच्चों की मौत का मामला इससे पहले हाई कोर्ट भी पहुंच चुका है। अधिवक्ता अंशुल तिवारी की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। याचिका में बैगा समुदाय के बच्चों की मौत, संक्रामक बीमारियों और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर न्यायिक निगरानी का दायरा और व्यापक हुआ है।
49 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र के 57 गांवों में 49,553 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। जांच के दौरान सर्दी-खांसी और बुखार के 6,320, मलेरिया के 1,101, दाने के साथ बुखार के 539 और चर्मरोग के 255 मरीज चिह्नित किए गए। वहीं, 40,835 बच्चों का टीकाकरण किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रशासन ने मृत बच्चों के 32 परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। हालांकि, इन प्रयासों के बीच प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने का सिलसिला जारी है। अब निगाहें केंद्र और राज्य सरकारों के जवाब तथा प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर रहेंगी।
