
बागली। श्राद्ध पक्ष के 16 दिन तक मालवा एवं निर्माण में लोक देवी के रूप में पूजी जाने वाली सजां माता का पर्व ग्रामीण क्षेत्र में उत्साह के साथ मनाया जाता है। आखरी 2 दिन पूर्व संजा माता की विदाई हंसी-खुशी के साथ करने के लिए कला कोट कीआकृति बनायी जाती है। और आखिरी दिन चोवदस तिथि स्थिति पर उसमें संजा माता के साथ पूरी फौज व्यवस्था शामिल रहती है।
जो उनके साथ उनके ससुराल तक उनकी सुख सुविधा के लिए जाती है। मातृशक्ति मंडल ने नवभारत संवाददाता सुनील योगी को बताया कि बागली नगर क्षेत्र में इस बार यह उत्साह सामूहिक रूप से बनाया गया वार्ड क्रमांक 10 की सेवा निवृत शिक्षिका दाखा सामाजिक कार्यकर्ता कारपेंटर किशन कारपेंटर और अन्य सहयोगी महिलाओंने पूरे समय तक पर्व के गीत गाकर इस पर्व को मनाया आखिरी दिन सजां माता का बेहतर सिंगार किया गया और अमावस्या पर विदाई देने की तैयारी की गई जिन लड़कियों की शादी हो चुकी उन्होंने इस व्रत के रूप में 16 कन्याओं को बुलाकर उद्यापन भी करवाया।
