नई दिल्ली, राजधानी दिल्ली में लगातार आयोजित हो रहे बड़े धरना-प्रदर्शनों और सुरक्षा कारणों से उत्पन्न यातायात व्यवधान ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली जैसे प्रमुख इलाकों में हजारों लोगों के जमावड़े के कारण पिछले तीन दिनों से बाजारों का हाल बेहाल हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इस पर तत्काल और कड़े कदम उठाने की गुहार लगाई है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि और रामलीलाओं का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसके बाद दीवाली तक त्योहारी सीजन का सबसे महत्वपूर्ण दौर चलेगा, लेकिन ऐसे में राजधानी के मुख्य व्यापारिक केंद्रों पर लगातार हो रहे प्रदर्शनों से करीब 15 लाख व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
पिछले तीन दिनों में दिल्ली के कुल कारोबार में 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट, खरीदारी के लिए आने वाले ग्राहक घटे
CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा द्वारा जारी किए गए हालिया सर्वे आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन दिनों के भीतर दिल्ली के कुल व्यापार में लगभग 70 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और कारोबार सिमटकर केवल 30 प्रतिशत पर आ गया है। संगठन के अनुसार, दिल्ली के बाहर से रोजाना खरीदारी के लिए आने वाले दो से तीन लाख लोग घटकर मात्र 40 से 50 हजार के बीच रह गए हैं, जबकि स्थानीय ग्राहकों का फुटफॉल भी आधे से अधिक गिर गया है। बार-बार मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने, कनॉट प्लेस, संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास भयंकर ट्रैफिक जाम लगने की वजह से ग्राहक बाजारों का रुख करने से कतरा रहे हैं, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
त्योहारी सीजन में प्रतिबंध लगाने और वैकल्पिक स्थायी ‘प्रोटेस्ट जोन’ बनाने की उठी पुरजोर मांग
व्यापारिक संगठनों का साफ कहना है कि वे देश में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के अधिकार का पूरा सम्मान करते हैं, परंतु त्योहारी सीजन के पीक समय पर राजधानी के बीचों-बीच अनिश्चितकालीन और बड़े जमावड़े अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ रहे हैं। CTI ने प्रधानमंत्री मोदी से मांग की है कि नवरात्रि से दीपावली तक दिल्ली के मुख्य बाजारों, जंतर-मंतर, संसद मार्ग और लुटियंस जोन में 1,000 से अधिक लोगों के धरने-प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए तथा भविष्य के लिए संख्या सीमा तय की जाए। साथ ही, बाहरी दिल्ली के बुराड़ी या रामलीला मैदान जैसी जगहों पर एक स्थायी ‘प्रोटेस्ट जोन’ निर्धारित किया जाए, ताकि आम जनता, यातायात और व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

