इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखी भविष्य की टेक्नोलॉजी 

नई दिल्ली, इंडिया मोबाइल कांग्रेस में इस बार केवल तेज इंटरनेट यानी 5G और 6G की ही चर्चा नहीं है, बल्कि यहां भविष्य की ऐसी तकनीकों का सजीव प्रदर्शन किया जा रहा है जो इंसानी कामकाज और खेती किसानी की पूरी तस्वीर बदल देंगी. इस प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र एलआईएफ आई टेक्नोलॉजी , एग्रीकल्चर ड्रोन और मिट्टी जांच सेंसर बने हुए हैं. ये तीनों तकनीकें इस बात का साफ संकेत हैं कि आने वाला कल लाइट, डेटा, एआई और रोबोटिक्स के तालमेल से चलेगा.

द्वारका स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में चल रही प्रदर्शनी

में लाई-फाई यानी लईट फिडेलिटी तकनीक पर आधारित एक हाइड्रोलिक मशीन का हैरतअंगेज डेमो दिखाया गया. इस तकनीक में पारंपरिक रेडियो तरंगों के बजाय एलईडी की रोशनी के जरिए डेटा ट्रांसफर किया जाता है. इस तकनीक के तहत जब लैपटॉप से कोई कमांड दी जाती है तो लाइट की अदृश्य रूप से बदलती तीव्रता को रिसीवर , डिजिटल डेटा में बदल कर हाइड्रोलिक मशीन को निर्देश भेजकर काम आरंभ कर देता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक की मदद से एक ऑपरेटर दूर बैठकर कंप्यूटर के जरिए कई भारी मशीनों को एक साथ कंट्रोल कर सकेगा. जब इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ा जाएगा, तो फैक्ट्रियों और उद्योगों में काम करने का तरीका पूरी तरह ऑटोमैटिक हो जाएगा. हालांकि इससे पारंपरिक और एक जैसे रहने वाले रोजगार के तरीके बदलेंगे, लेकिन प्रोग्रामिंग, मेंटेनेंस और डिसीजन मेकिंग के क्षेत्रों में नौकरियों के नए रास्ते भी खुलेंगे. इसके अलावा, लाई-फाई तकनीक उन संवेदनशील जगहों जैसे अस्पताल या सैन्य ठिकाने के लिए बेहद सुरक्षित है जहां रेडियो फ्रीक्वेंसी के कारण हैकिंग या डेटा लीक का खतरा रहता है.

इस प्रदर्शनी में कृषि के क्षेत्र में तकनीक का सबसे बड़ा चमत्कार एग्रीकल्चर ड्रोन के रूप में सामने आया है. डेमो के दौरान बताया गया कि यह ड्रोन महज दस से पंद्रह मिनट में तीन एकड़ तक के बड़े कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों और खादों का छिड़काव कर सकता है. इसके लिए 10 लीटर और 15 लीटर की क्षमता वाले टैंक मॉडल पेश किए गए हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा किसानों की सेहत और सुरक्षा से जुड़ा है. अब किसानों को जहरीले रसायनों के छिड़काव के लिए खुद खेतों में उतरने की जरूरत नहीं होगी, जिससे वे खतरनाक केमिकल एक्सपोजर से बच सकेंगे. साथ ही, खेतों में छिपे सांप और बिच्छू जैसे जीवों का खतरा भी खत्म हो जाएगा. जिस काम को करने में कई मजदूरों को घंटों पसीना बहाना पड़ता था, उसे अब एक ऑपरेटर ड्रोन की मदद से चुटकियों में पूरा कर देगा. आधुनिक ड्रोन में लगे सेंसर्स केवल उन्हीं पौधों पर दवा छिड़कते हैं जिन्हें जरूरत होती है, जिससे कीटनाशकों की भारी बर्बादी भी रुकती है.

पारंपरिक तौर पर किसानों को मिट्टी की जांच के लिए सैंपल लेकर सरकारी लैब में जाना पड़ता था, जहां रिपोर्ट आने में हफ्तों लग जाते थे. लेकिन इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित मिट्टी जांच सेंसर ने इस समस्या का ऑन-स्पॉट समाधान दे दिया है. इस पोर्टेबल सेंसर को मिट्टी में लगाते ही खेत की नमी, पीएच लेवल और जरूरी पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम की सटीक जानकारी तुरंत मिल जाएगा.इस डेटा की मदद से किसान सटीक रूप से यह तय कर पाएंगे कि खेत में कब और कितना पानी देना है और किस खाद की कितनी जरूरत है. इससे न सिर्फ लागत में कमी आएगी, बल्कि जरूरत से ज्यादा यूरिया या पानी के इस्तेमाल से खराब हो रही जमीन को भी बचाया जा सकेगा.

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