
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में एशिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी फोरम इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के 10वें संस्करण का औपचारिक उद्घाटन करते हुए देश और दुनिया के टेक दिग्गजों के सामने भारत के डिजिटल कायाकल्प का खाका पेश किया. इस मौके पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगामी 6जी क्रांति में वैश्विक स्तर पर देश के नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया.
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान दरअसल तकनीक के लोकतंत्रीकरण का एक अभूतपूर्व राष्ट्रीय प्रयास है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत में मोबाइल फोन सिर्फ कॉल करने या संदेश भेजने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह सुशासन और अंतिम छोर तक पारदर्शी सेवाएं पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है. 5जी के तीव्र विस्तार पर बात रखते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि देश के प्रत्येक जिले तक 5जी कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है, जिसने इंटरनेट स्पीड को कई गुना बढ़ाकर डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन के पूरे तंत्र को बदल दिया है.
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते सरकारी योजनाओं में होने वाला रिसाव पूरी तरह रुका है और पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि गलत हाथों में जाने से बची है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में आज दुनिया के 40 प्रतिशत से अधिक रियल-टाइम डिजिटल वित्तीय लेनदेन हो रहे हैं, जो यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक अब किसी खास वर्ग तक सीमित विशेषाधिकार नहीं बल्कि आम नागरिक की रोजमर्रा की ताकत बन चुकी है.
वहीं, केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की प्रगति का विस्तृत लेखा-जोखा पेश करते हुए कहा कि भारत ने 4जी के दौर में दुनिया का अनुसरण किया और 5जी में दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ा, लेकिन अब 6जी तकनीक में भारत पूरी दुनिया का नेतृत्व करेगा. उन्होंने डेटा दरों में आई ऐतिहासिक गिरावट का उल्लेख करते हुए बताया कि एक दशक पहले जहां प्रति जीबी डेटा के लिए उपभोक्ताओं को औसतन लगभग 268 रुपये चुकाने पड़ते थे, वहीं आज भारत में डेटा की दरें घटकर आठ रुपये प्रति जीबी से भी कम रह गई हैं, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर सबसे किफायती इंटरनेट उपलब्ध कराने वाला देश बन गया है.
सिंधिया ने जानकारी दी कि भारत 55 करोड़ से अधिक 5जी उपभोक्ताओं के साथ विश्व का सबसे तेजी से 5जी अपनाने वाला बाजार बन चुका है और सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इस आंकड़े को एक अरब यूजर्स तक पहुंचाने का है. उन्होंने भारत 6जी अलायंस की शोध और विकास पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में हजारों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट दाखिल किए जा चुके हैं, जो भविष्य की अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी में भारत की मजबूत स्थिति को सुनिश्चित करते हैं. मंच से दोनों नेताओं ने यह संदेश स्पष्ट किया कि भारत अब केवल तकनीकों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया के लिए नवाचार और डिजिटल समाधानों का प्रमुख निर्माता बन चुका है.
