
जबलपुर। रीवा के आयुष्मान नर्सिंग होम प्राइवेट लिमिटेड को हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने 24 सितंबर 2026 के उस आदेश के प्रभाव पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी, जिसमें अस्पताल का संचालन तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए थे। अस्पताल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के अग्रवाल और अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने कथित कमियों को लेकर केवल तीन दिन का अस्पष्ट नोटिस दिया और जवाब पर विचार किए बिना अस्पताल बंद करने का आदेश जारी कर दिया। याचिका के अनुसार 23 सितंबर की रात करीब 10 : 30 बजे कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ, एसडीएम सहित अधिकारियों ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। अस्पताल ने दावा किया कि कार्रवाई में मध्य प्रदेश उपचारगृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम 1973 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अस्पताल में करीब 30 मरीज भर्ती होने और यह 100 बिस्तर का अस्पताल होने की जानकारी भी अदालत को दी गई।
राज्य की ओर से कहा गया कि बंद करने का आदेश लागू नहीं किया गया है। हालांकि, कोर्ट ने रिकॉर्ड में तत्काल बंद करने के स्पष्ट निर्देश का हवाला देते हुए इस आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने अगली सुनवाई तक अस्पताल बंद नहीं करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस महानिदेशक को अस्पताल और समीप स्थित सरदार पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने व रीवा सीएमएचओ को पूरी कार्रवाई का रिकार्ड पेश करने के निर्देश दिए। कलेक्टर से विस्तृत हलफनामा और राज्य से दो सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
