यरुशलम, 07 अक्टूबर (वार्ता) इजरायल में बुधवार को सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले की तीसरी बरसी पर शोक मनाया गया और प्रदर्शनों का आयोजन किया गया।
हमले की बरसी पर इजरायल के विभिन्न हिस्सों में स्मृति कार्यक्रमों के साथ विरोध प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा चूक के लिए सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और घटनाओं की जांच के लिए राज्य आयोग गठित करने की मांग की। यरुशलम में संसद के बाहर और कई मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन हुए। तेल अवीव में भी प्रदर्शनकारियों ने मृतकों की याद में प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित किये।
‘अक्टूबर काउंसिल’ ने मृतकों के परिजनों, हमले में बचे लोगों और बंधकों के परिवारों से स्मृति कार्यक्रमों तथा विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की। संगठन ने कहा कि तीन वर्ष बीतने के बावजूद सात अक्टूबर की घटनाओं की पूरी जांच नहीं हुई है और चुनाव में यह सवाल प्रमुख रहेगा कि इजरायल सुरक्षा विफलताओं की जांच कर बदलाव करेगा या अनुत्तरित सवालों को छोड़ देगा।
अमेरिका समर्थित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने भी हमले की बरसी पर मारे गये और अगवा किये गये लोगों को याद किया तथा इसके बाद हुए युद्ध में इजरायलियों और फलस्तीनियों के नुकसान और पीड़ा का उल्लेख किया। बोर्ड ने कहा कि इजरायल की वास्तविक और स्थायी सुरक्षा किसी भी शांति की बुनियाद है और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सात अक्टूबर जैसी घटना दोबारा न हो।
इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की देश की सबसे गंभीर सुरक्षा चूक से निपटने की भूमिका 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनने की संभावना है।
हमले के बाद श्री नेतन्याहू पर तीखा दबाव पड़ा, लेकिन वह वर्षों से जारी युद्ध और लंबे समय से लागू आपात स्थिति के बीच पद पर बने हुए हैं। उन पर हमले से पहले हुई विफलताओं की व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करने और स्वतंत्र जांच का समर्थन नहीं करने को लेकर लगातार आलोचना होती रही है। युद्ध के दौरान कड़े रुख वाले नेता के रूप में उन्हें समर्थन भी हासिल है।
हमले के समय पद पर रहे लगभग सभी वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी बाद में अपने पद छोड़ चुके हैं, जबकि श्री नेतन्याहू अब भी प्रधानमंत्री हैं। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और इजरायल रक्षा बल के पूर्व प्रमुख गादी आइजेनकोट ने गाजा युद्ध में अपने बेटे और दो भतीजों को खोया है। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू को पद से हटाना उनके चुनाव अभियान का प्रमुख मुद्दा है।
श्री नेतन्याहू ने दावा किया है कि वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें हमले से पहले मिली चेतावनियों की जानकारी नहीं दी और यदि उन्हें समय पर जानकारी दी गयी होती तो वह नरसंहार को रोक सकते थे। हाल की मीडिया रिपोर्टों में इस दावे पर सवाल उठाये गये हैं।
‘हारेत्ज’ ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद द्वारा सात अक्टूबर से कुछ दिन पहले श्री नेतन्याहू को हमास की बड़ी कार्रवाई की तैयारी की चेतावनी दिये जाने की खबर दी। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी इस चेतावनी की रिपोर्ट दी है। ‘द अटलांटिक’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के अनुसार मिस्र के खुफिया प्रमुख अब्बास कामेल ने भी इसी तरह की चेतावनी दी थी। श्री नेतन्याहू ने यूएई और मिस्र से ऐसी चेतावनियां मिलने से इनकार किया है।
हालिया जनमत सर्वेक्षणों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 20-22 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि पिछले चुनाव में उसके पास 32 सीटें थीं। उनके दक्षिणपंथी गठबंधन को 50-54 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से कम है। हालांकि, नेतन्याहू समर्थक चैनल 14 के अनुमान में उनके गठबंधन को 63 सीटें दी गयी हैं।
इजरायल का चुनाव अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से एक सप्ताह पहले होगा। अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण में बदलाव होने पर इजरायल को हथियारों की बिक्री और अमेरिका की ओर से दी जाने वाली 3.8 अरब डॉलर की वार्षिक सैन्य सहायता पर फिर बहस हो सकती है। ऐसे में इजरायल की घरेलू राजनीति का इन मुद्दों पर भी असर पड़ सकता है।
