मुंबई, 07 अक्टूबर (वार्ता) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर और कच्चे तेल में रही तेजी से बुधवार को रुपया दबाव में रहा और अबतक के दूसरे सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ।
अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में एक समय रुपया 96.85 रुपये प्रति डॉलर तक फिसल गया था। अंत में यह 40 पैसे की गिरावट में 96.76 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो साढ़े चार महीने के अधिक का सबसे कम बंद भाव है।
यह इस साल 20 मई के बाद रुपये का सबसे निचला स्तर है। उस दिन रुपया 96.96 रुपये प्रति डॉलर तक टूटने के बाद 96.86 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था जो अब तक का ऐतिहासिक निचला स्तर है।
रुपये के कमजोर पड़ने की मुख्य वजह डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल में तेजी है। दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर सूचकांक आज 0.5 प्रतिशत मजबूत होकर 102 के पार पहुंच गया। इसके अलावा लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा एक डॉलर चढ़कर 101.50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा।
रुपये की शुरुआत एक पैसे की गिरावट के साथ 96.37 रुपये प्रति डॉलर पर हुई। यह 96.34 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूत होने के बाद तेजी से लुढ़का और दोपहर तक 96.85 रुपये प्रति डॉलर तक टूट गया।
लंबे समय तक 94-95 रुपये प्रति डॉलर के बीच रहने के बाद पिछले सप्ताह से रुपये में और गिरावट देखी जा रही है।
रुपये की गिरावट के बारे में पूछे जाने पर रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज सुबह संवाददाताओं से कहा था कि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक रुपया अभी अपनी क्षमता से कम स्तर पर है।
