विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों का उत्साह 2026-27 की दूसरी तिमाही में सुधरा : फिक्की सर्वेक्षण

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (वार्ता) उद्योग मंडल फिक्की के विनिर्माण क्षेत्र के 71वें त्रैमासिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में उत्पादन और मांग को लेकर कंपनियों द्वारा दी गयी सूचनाएं बाजार की स्थिति में सुधार का संकेत देती हैं। दूसरी तिमाही में लगभग 95 प्रतिशत इकाइयों के उत्पादन स्तर में वृद्धि हुई या वह पहले के स्तर पर बना रहा ।

इस सर्वे के आधार पर फिक्की द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि 2026-27 की पहली तिमाही में जहां 77 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उत्पादन स्तर में वृद्धि या स्थिरता की जानकारी दी थी, वहीं दूसरी तिमाही में इस तरह की उत्साहजनक रिपोर्ट 95 प्रतिशत के जवाब में मिली।

इस दौरान मांग को लेकर भी कंपनियों में उत्साह दिखा। दूसरी तिमाही में 90 प्रतिशत इकाइयों ने कहा कि उनके ऑर्डर में वृद्धि या स्थिरता रही है जबकि पिछली तिमाही में ऐसा जवाब देने वालों का अनुपात 77 प्रतिशत था।

फिक्की ने कहा, ‘ यह पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव से उबरने के संकेत दर्शाता है। निर्माताओं की अपेक्षाओं पर आधारित प्रतिक्रियाओं से विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि के लिए समग्र रूप से सकारात्मक धारणा और घरेलू आर्थिक बुनियाद के स्थिर रहने का संकेत मिलता है।’

इस सर्वेक्षण में जुलाई-सितंबर 2026 की अवधि वाली वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए नौ प्रमुख क्षेत्रों के निर्माताओं के प्रदर्शन और कारोबारी धारणा का आकलन किया गया। इन क्षेत्रों में ऑटोमोटिव एवं ऑटो कंपोनेंट्स, पूंजीगत वस्तुएं, रसायन एवं संबद्ध उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स, ग्लास, मशीन टूल्स, धातु एवं धातु उत्पाद, कपड़ा, परिधान एवं तकनीकी वस्त्र तथा विविध विनिर्माण क्षेत्र शामिल हैं। सर्वेक्षण के लिए बड़े उद्योगों के साथ-साथ लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की विनिर्माण इकाइयों से प्रतिक्रियाएं प्राप्त की गईं। इन कंपनियों का संयुक्त वार्षिक कारोबार 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

फिक्की के सर्वे के अनुसार पिछली तिमाही की तुलना में क्षमता उपयोग पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। विनिर्माण क्षेत्र में मौजूदा औसत क्षमता उपयोग लगभग 75 प्रतिशत है, जो पिछले सर्वेक्षण में दर्ज 72 प्रतिशत से अधिक है।

फिक्की के अनुसार अगले छह महीनों के लिए निवेश का परिदृश्य स्थिर बना हुआ है। हालांकि, क्षमता विस्तार में कंपनियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उत्पन्न अनिश्चितता-जैसे सीमा शुल्क, व्यापार प्रतिबंध और मांग से जुड़ी अनिश्चितता-शामिल हैं। इसके अलावा, कुशल श्रम एवं श्रमिकों की उपलब्धता, कच्चे माल की कमी, बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और नियामकीय चुनौतियां भी क्षमता विस्तार में प्रमुख बाधाएं हैं।

सर्वे में शामिल के अनुसार निर्यात के क्षेत्र लगभग 74 प्रतिशत इकाइयों ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में निर्यात के स्तर में वृद्धि या स्थिरता की जानकारी दी थी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में लगभग 80 प्रतिशत इकाइयों ने बताया कि उनके निर्यात पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में या तो अधिक रहे या समान स्तर पर रहे।

फिक्की का कहना है कि सरकार और उद्योग द्वारा निर्यात में विविधता लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।

फिक्की की विज्ञप्ति में बताया गया है कि 43 प्रतिशत इकाइयां अगले तीन महीनों में अतिरिक्त कार्यबल की नियुक्ति करने पर विचार कर रही हैं। पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत था।इससे संकेत मिलता है कि विनिर्माण क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों और उत्पादन की संभावनाओं में सुधार के साथ कंपनियों की नई नियुक्तियों की इच्छा भी बढ़ी है।

 

 

 

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