सिंधिया संपत्ति विवाद: प्रतिमा देवी के आवेदन पर सुनवाई पूरी

ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की बेशकीमती संपत्तियों को लेकर करीब चार दशक से चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और परिवार की बुआओं के बीच चल रहे इस पुराने संपत्ति विवाद में दिवंगत पद्मावती राजे की पुत्री प्रतिमा देवी राणा ने ग्वालियर न्यायालय में आवेदन देकर स्वयं को प्रकरण में पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध किया था।

सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में बुधवार को जिला न्यायालय में ऑर्डर 23 रूल 3 के तहत प्रस्तुत समझौते के आवेदन पर विस्तृत बहस हुई। वादिनी प्रतिमा देवी राणा के अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने दस्तावेज पढ़े बिना हस्ताक्षर कर दिए थे, जबकि प्रतिवादी ज्योतिरादित्य सिंधिया पक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर से कहा गया कि समझौते के दस्तावेज में क्या लिखा था, इसकी उन्हें जानकारी नहीं थी और उन्होंने दस्तावेज को पढ़े बिना ही हस्ताक्षर कर दिए थे। इसके जवाब में प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वादिनी स्वयं यह स्वीकार कर रही हैं कि उन्होंने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर रही हैं कि बिना दस्तावेज पढ़े और उसकी सामग्री जाने हस्ताक्षर किसके कहने पर किए गए। इसी बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच न्यायालय में विस्तृत बहस हुई और अपने-अपने तर्क रखे गए। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख नियत की है। वहीं, नवभारत प्रतिनिधि को प्राप्त जानकारी अनुसार इस प्रकरण में समझौता होने की शीघ्र संभावना है।

यह प्रकरण उस लंबी कानूनी लड़ाई का अहम हिस्सा है, जिसकी शुरुआत संपत्ति के उत्तराधिकार और स्वामित्व को लेकर हुई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने युवा अवस्था में अपनी दादी विजया राजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया के खिलाफ संपत्ति अधिकार को लेकर मुकदमा दायर किया था। विवाद का मूल प्रश्न यह रहा कि जीवाजीराव सिंधिया की संपत्तियां व्यक्तिगत थीं या एचयूएफ की, और उत्तराधिकार किस नियम के तहत होगा।

नवभारत प्रतिनिधि को प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामले में जय विलास पैलेस परिसर, सख्या विलास, सुसेरा कोठी, कुलेथ कोठी, कॉटेज हिल, टेकनपुर रिट्रीट सहित कई बेशकीमती संपत्तियां, सोना चांदी और ऐतिहासिक चल संपत्तियां भी विवाद का हिस्सा रही हैं। विवादित चल संपत्तियों की सूची 300 पन्नों की थी। इसमें ऐतिहासिक पेंटिंग्स, 623 किलो सोना, 332 किलो चांदी और 9वीं से 14वीं सदी तक की प्राचीन पेंटिंग्स शामिल थीं.

मुकदमा चलने के दौरान ही विजया राजे सिंधिया का निधन हो गया। इसके बाद उनके पूर्व निजी सचिव सरदार संभाजी आंग्रे को उनकी संपत्ति की ओर से अदालत में पेश होने की जिम्मेदारी दी गई।

प्रकरण में बदलते रहे प्रतिवादी

इस मामले में प्रतिवादी भी समय समय पर बदलते रहे। शुरुआत में पहले प्रतिवादी माधवराव सिंधिया थे, जबकि दूसरी प्रतिवादी उनकी पत्नी माधवी राजे सिंधिया थीं. तीसरी, चौथी और पांचवीं प्रतिवादी विजया राजे और जीवाजीराव सिंधिया की बेटियां उषा राजे राणा, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे थीं। छठी और सातवीं प्रतिवादी उनकी सबसे बड़ी बेटी पद्मावती राजे ‘अक्कासाहेब’ देव बर्मन की बेटियां कनिका देवी देव बर्मन और प्रतिमा देवी राणे बर्मन थीं। माधवराव सिंधिया की मौत के बाद उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और बेटी चित्रांगदा राजे सिंधिया पहले प्रतिवादी के रूप में इस मुकदमे में शामिल हुए। अलग-अलग मुकदमे ग्वालियर, मुंबई और पुणे की अदालतों में दशकों से चलते रहे। 2021 से समझौते की कोशिशें सामने आईं और मार्च 2026 में पक्षकारों की ओर से विवाद आपसी सहमति से सुलझने तथा ट्रायल कोर्ट में कम्प्रोमाइज दाखिल करने की जानकारी दी गई। ऐसे में प्रतिमा देवी के पक्षकार बनाए जाने के आवेदन पर आज का आदेश इस पूरे प्रकरण की आगे की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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