
नयी दिल्ली, 07 अक्टूबर (वार्ता) भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के 31वें सम्मेलन (कॉप-31) में पेरिस समझौते की मौजूदा कमियों को दूर करने, जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और उनके कार्यान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को फिजी में ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पूर्व-कॉप-31 बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए कॉप-31 की प्राथमिकताओं पर पूर्ण सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अब पहले से तय जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने पर ध्यान देना चाहिए।
श्री यादव ने कहा कि यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के तहत दीर्घकालिक लक्ष्य पहले ही तय किये जा चुके हैं, जिनमें वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की महत्वाकांक्षा भी शामिल है। अब ध्यान इन लक्ष्यों की दिशा में कार्रवाई तेज करने पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जलवायु बहुपक्षवाद के दीर्घकालिक लक्ष्यों और दिशा को लेकर व्यापक सहमति है लेकिन विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान, व्यवहार और नैतिकता तथा उपलब्ध संसाधनों और आवश्यकताओं के बीच समझ की कमियां हैं। कॉप-31 को इन कमियों को दूर करने और आम सहमति बनाने का प्रयास करना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी पक्षों को यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए और एक-दूसरे को इन्हें पूरा करने में सक्षम बनाना चाहिए। उन्होंने क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए हर वर्ष ठोस उदाहरण और सफलता की कहानियां साझा करने का आग्रह किया, जिनसे प्रभावी शमन, बड़े पैमाने पर अनुकूलन और कार्यान्वयन के साधनों की उपलब्धता का प्रदर्शन हो।
श्री यादव ने कहा कि अंताल्या में होने वाले कॉप-31 की सफलता का आकलन केवल नये लक्ष्यों या घोषणाओं से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि क्या कार्यान्वयन में तेजी आयी, जरूरतमंदों तक सहायता पहुंची और मौजूदा समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सका। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तुवालू के लोगों के जज्बे को सलाम करते हुए की। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आशा, आत्मविश्वास और एकजुट होने का संकल्प मजबूत होता है।
