
सीहोर। पिछले कुछ दिनों से सीहोर शहर की सीमा के आसपास सक्रिय बाघ की तलाश के लिए वन विभाग द्वारा ट्रैप कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जा रही है. मंगलवार सुबह बाघ ने निगरानी वाले क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए मुरली और अवधपुरी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. मुरली रोड पर बाघ को कुछ लोगों ने देखा. बाघ की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बाघ वहां से आगे बढ़ चुका था. इसके बाद टीम ने उसके पगचिह्न और अन्य मूवमेंट के संकेतों के आधार पर सर्चिंग शुरू कर दी.
बीते कुछ दिन से शहरी क्षेत्र के ईदगाह, दशहरा बाग सहित कस्बा के झुनियाबाड़ी में बाघ के देखे जाने की खबर सरगर्म बनी है. वन विभाग का अमला बाघ के पगमार्क के आधार पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार सर्चिंग कर रहा है. इसके बाद भी बाघ लगातार ओझल बना हुआ है. इधर मंगलवार की अल सुबह एक बार फिर बाघ शहरी क्षेत्र में तफरीह करता लोगों को दिखा. जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 6.30 बजे मुरली क्षेत्र में सुमेर सिंह, मनीष और सतीश परमार ने बाघ को घूमते हुए देखा. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बाघ मुरली से आगे बढ़ते हुए रेलवे पटरी के किनारे अवधपुरी की ओर गया. इसके बाद उसके अवधपुरी पानी की टंकी के आसपास होने की जानकारी मिली. बाघ की गतिविधि की सूचना पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और आसपास के खेतों तथा झाडिय़ों में जांच की.
अवधपुरी पानी की टंकी के पास जांच के दौरान वन विभाग की टीम को सुनेर भाई के खेत में बाघ के पगचिह्न और बैठने के निशान मिले. इन संकेतों के आधार पर वनकर्मी बाघ की दिशा और ताजा मूवमेंट का पता लगाने में जुटे हैं. मंडी, मुरली, अवधपुरी और हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के आसपास निगरानी बढ़ाई गई है. वनकर्मियों ने आसपास के खेतों, झाडिय़ों और खाली क्षेत्रों में कॉम्बिंग शुरू कर दी है. ग्रामीणों और रहवासियों से सुबह-शाम अकेले सुनसान क्षेत्रों में नहीं जाने तथा बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेजने की अपील की गई है. बाघ दिखाई देने या उसके ताजा पगचिह्न मिलने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने के लिए कहा गया है. वन परिक्षेत्राधिकारी प्रियंका गोयल, एसडीओ कृतिका जायसवाल एवं डिप्टी रेंजर विजय कसोटिया व अमले द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है.
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से जिला मुख्यालय के नजदीक जहांगीरपुरा और दशहरा बाग क्षेत्र में भी बाघ की गतिविधि सामने आई थी. इसके अलावा जिले के शाहगंज, रेहटी व अन्य वन क्षेत्रों में भी बाघ और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचनाएं मिलती रही हैं.
नाइटविजन कैमरों और ड्रोन से जारी तलाश
शहर की सीमा में लगातार दिख रहे बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने अलग-अलग स्थानों पर लगभग आठ ट्रैप कैमरे लगाए हैं. इसके अलावा ड्रोन से भी संभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है. हालांकि मंगलवार सुबह बाघ का मूवमेंट कैमरों की निगरानी वाले क्षेत्रों से आगे रिहायशी इलाकों की ओर देखा गया. अब वन अमला पगचिह्नों के साथ ट्रैप कैमरों से मिलने वाले फुटेज और ड्रोन निगरानी को मिलाकर बाघ की संभावित लोकेशन तलाश रहा है.
मूवमेंट पर लगातार नजर रखे हैं
रातापानी और आसपास के जंगलों से लगे क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही होती रहती है। बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। ट्रैप कैमरे, ड्रोन और मैदानी सर्चिंग के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। प्रयास है कि बाघ को आबादी वाले क्षेत्र से दूर जंगल की दिशा में सुरक्षित रूप से भेजा जा सके.
विजय कसोटिया,
डिप्टी रेंजर, सीहोर
