मुंबई, महाराष्ट्र के पारंपरिक दहीहंडी उत्सव की अनूठी परंपरा अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघकर वैश्विक मंच पर चमक उठी है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विशेष आशीर्वाद व सहयोग तथा प्रो गोविंदा लीग के अध्यक्ष पूर्वेश सरनाईक के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र के पारंपरिक गोविंदा दल ने स्पेन के तारागोना में आयोजित प्रतिष्ठित ‘कॉन्कुर्स इंटरनैशनल्स 2026’ उत्सव में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। स्पेन में आयोजित यह भव्य उत्सव महाराष्ट्र के दहीहंडी उत्सव से काफी हद तक सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां भारत की तरह ही बड़ी संख्या में मानवीय मनोरे और थर तैयार किए जाते हैं। इस वर्ष की इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कुल 42 टीमों ने भाग लिया, जिसमें महाराष्ट्र के दल ने अपनी कला से सबका ध्यान आकर्षित किया।
विश्व प्रसिद्ध ‘कास्टेलर्स विला फ्रांका’ के साथ किया संयुक्त अभ्यास, पारंपरिक तकनीकों और अनुभवों का हुआ अद्भुत आदान-प्रदान
स्पेनिश दौरे के दौरान महाराष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल को दुनिया की सबसे सफल और अचूक मानवीय मनोरे बनाने वाली टीमों में शुमार ‘कास्टेलर्स विला फ्रांका’ (Castellers de Vilafranca) के साथ मिलकर अभ्यास करने का सुनहरा अवसर मिला। दोनों देशों के गोविंदा समूहों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर संयुक्त रूप से मानवीय मनोरे खड़े किए और इस पारंपरिक कला की बारीकियों, तकनीकों तथा अनुभवों को आपस में साझा किया। इस दौरान स्पेनिश टीम ने 9 में से 9 स्तरों का ऐतिहासिक मनोरा खड़ा कर अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रो गोविंदा लीग के अध्यक्ष पूर्वेश सरनाईक ने इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक मील का पत्थर बताया।
दहीहंडी को मिला वैश्विक मंच, भारत और स्पेन के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी रिश्तों को मिली नई दिशा
युवा सेना के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष पूर्वेश सरनाईक ने कहा कि महाराष्ट्र की इस लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। इस सफल दौरे के आयोजन और व्यवस्थापन में महाराष्ट्र राज्य दहीहंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र पांचाल, बाळा पडेलकर और गीता झगडे ने अहम भूमिका निभाई। भले ही महाराष्ट्र की दहीहंडी और स्पेन की मानवीय मनोरे बनाने की परंपराएं अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से निकली हों, लेकिन दोनों ही सामूहिक सहभागिता, अनुशासन और टीमवर्क पर आधारित हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन से भारत और स्पेन के बीच सांस्कृतिक संवाद को एक नई और मजबूत दिशा मिली है।

