भोपाल। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की व्यवस्था में नगर निगम ने बदलाव किया है. जिसकी शुरूआत सोमवार से हो गई है. अब दो साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों का पंजीयन सीधे तहसीलदार के स्तर पर नहीं हो सकेगा. ऐसे मामलों में न्यायालय के आदेश के बाद ही प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. नई व्यवस्था में तहसीलदार को एक साल से अधिक और दो साल तक पुराने मामलों के पंजीयन का अधिकार रहेगा. पहले एक साल से अधिक पुराने सभी मामलों का पंजीयन तहसीलदार स्तर पर किया जाता था.
-30 दिन बाद बढ़ेगी जांच
जन्म या मृत्यु की सूचना 30 दिन बाद लेकिन एक साल के भीतर देने पर जिला रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी की लिखित मंजूरी जरूरी होगी. प्रमाण पत्र में नाम, सरनेम या स्पेलिंग में सुधार कराने पर भी दस्तावेजों का अतिरिक्त सत्यापन किया जाएगा. मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए श्मशान या कब्रिस्तान की मूल रसीद प्रस्तुत करना जरूरी होगा. नगर निगम का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल स्कूल प्रवेश, पासपोर्ट, आधार, मतदाता सूची, ड्राइविंग लाइसेंस और सरकारी नौकरी सहित कई महत्वपूर्ण कामों में होता है. इसलिए पुराने रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जांच सख्त की गई है. गलत जानकारी देने पर 1000 रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है.
इनका कहना है
एक से दो साल पुराने मामलों का पंजीयन तहसीलदार करेंगे, जबकि दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायालय की प्रक्रिया अपनानी होगी.
सत्यप्रकाश बडग़ैयां, रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु, नगर निगम भोपाल
