भोपाल। भोपाल के नए मास्टर प्लान में शहर की ऐतिहासिक इमारतों, पुराने दरवाजों और महलों को संरक्षित कर उन्हें संवारने की बात कही गई है। हालांकि मास्टर प्लान अभी धरातल पर लागू नहीं हुआ है और इस पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया भी बाकी है, लेकिन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के सामने सबसे बड़ी चुनौती अतिक्रमण की है। भोपाल के कई पुराने ऐतिहासिक दरवाजे और इमारतें अतिक्रमण से घिरी हुई हैं। ऐसे में इन्हें सुरक्षित और आकर्षक बनाने के लिए पहले अतिक्रमण हटाना होगा।
भोपाल के पुराने जुमेराती पत्थर के दरवाजे के आसपास बड़ी संख्या में अतिक्रमण हैं। इसी तरह बरखेड़िया मंदिर के सामने स्थित पत्थर का दरवाजा भी दुकानों और अतिक्रमण से घिरा हुआ है। इस्लामी गेट के दोनों ओर भी अतिक्रमण की स्थिति बताई जाती है। वहीं शाहजहानाबाद स्थित ताजमहल और तीन मेहराब वाले पत्थर के दरवाजे के आसपास भी अतिक्रमण बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इन ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए केवल सौंदर्यीकरण पर्याप्त नहीं होगा। पहले यह तय करना होगा कि अतिक्रमण की स्थिति में क्या कार्रवाई की जाएगी और अतिक्रमण हटाने के बाद प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास कैसे किया जाएगा। नगर निगम और प्रशासन के सामने चुनौती यह भी है कि शहर के आसपास तेजी से बढ़ती कॉलोनियों के कारण खाली सरकारी जमीन की उपलब्धता सीमित है।
अगर अतिक्रमण हटाने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास का समाधान नहीं निकाला गया, तो मास्टर प्लान में ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने की योजना को जमीन पर उतारना मुश्किल हो सकता है।
