ग्वालियर, रेलवे सुरक्षा बल (GRP) और जीआरपी पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए म्यांमार की चार युवतियों को सुरक्षित हिरासत में लिया है और इस रैकेट में शामिल दो पुरुष आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ग्वालियर जीआरपी थाना प्रभारी दीपशिखा सिंह तोमर को भोपाल कंट्रोल रूम से मिली गुप्त सूचना के आधार पर, तिरुवनंतपुरम से हजरत निजामुद्दीन जाने वाली स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस ट्रेन में चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान सामान्य कोच में सफर कर रहा म्यांमार निवासी आरोपी मुबीन पुलिस के हत्थे चढ़ गया, जिसके पास से संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी आयुक्त (UNHCR) का आईडी कार्ड भी बरामद हुआ। पूछताछ के बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में दबिश देकर उसके दूसरे साथी सुलेमान को भी धर दबोचा।
पहाड़ों और नदियों के दुर्गम रास्तों से अवैध रूप से भारत में कराई गई थी एंट्री, जम्मू-कश्मीर भेजने की थी पूरी प्लानिंग
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मुबीन पिछले चार साल से अपनी पत्नी और बच्चों के साथ हैदराबाद में रह रहा था। वह और उसका साथी सुलेमान म्यांमार और बांग्लादेश के कुतुपालोंग रिफ्यूजी कैंपों से गरीब और मजबूर परिवारों की युवतियों को शादी का झांसा देकर या बहला-फुसलाकर भारत लाते थे। इन युवतियों को अवैध रूप से भारत में दाखिल करने के लिए तस्करों ने नेपाल या पूर्वोत्तर के जंगलों, पहाड़ों और नदियों के दुर्गम रास्तों (डंकी रूट) का इस्तेमाल किया था। बरामद की गई चार युवतियों में दो नाबालिग भी शामिल हैं, जिन्हें गिरोह के सदस्यों द्वारा आगे जम्मू-कश्मीर में ले जाकर जबरन शादी कराने की साजिश रची जा रही थी।
भाषा की बाधा को पार करने के लिए मोबाइल ट्रांसलेटर की ली गई मदद, मामले की गहराई से जांच में जुटी पुलिस
इस हाई-प्रोफाइल मानव तस्करी मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाषा की बनी, क्योंकि हिरासत में ली गई युवतियों को केवल म्यांमार की स्थानीय भाषा और रोहिंग्या ही बोलनी आती थी। जीआरपी अधिकारियों ने मोबाइल ट्रांसलेटर और एक द्विभाषी (इंटरप्रेटर) विशेषज्ञ की मदद से जब युवतियों से बातचीत की, तो इस पूरे संगठित अपराध का काला चिट्ठा खुलकर सामने आ गया। फिलहाल, पुलिस दोनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग देश के किन-किन हिस्सों में सक्रिय हैं और अब तक कितनी लड़कियों को इस अवैध धंधे का शिकार बनाया जा चुका है।

