भारत पर बढ़ा दुनिया का भरोसा! मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज विकास ने बनाया निवेशकों की पहली पसंद

नयी दिल्ली, राजधानी दिल्ली में कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन चल रहा है। इसमें दुनियाभर के दिग्गज अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ पहुंचे हैं। उन्होंने कहा निवेश के लिहाज से भारत अनुकूल देश है।

राजधानी दिल्ली में कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 चल रहा है। इस कॉन्क्लेव में दुनिया भर से आए अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने रविवार को वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक चुनौतियों के बीच देशों की आर्थिक मजबूती बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस सम्मेलन में देश की विकास संभावनाओं, वैश्विक व्यापार व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

ब्राजील स्थित क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के कार्यकारी निदेशक जुलियानो असुन्साओ ने आईएएनएस से कहा कि आज दुनिया जिस सबसे बड़े साझा जोखिम का सामना कर रही है, वह जलवायु परिवर्तन है।

जलवायु संकट किसी एक देश का मुद्दा नहीं है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी होगा। भारत और ब्राजील न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर रहे हैं, बल्कि समाधान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

Covid-19 के बाद भारत ने की प्रभावशाली आर्थिक गति हासिल
स्वीडिश के अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने कहा भारत की विकास संभावनाएं मजबूत हैं और Covid-19 के बाद देश ने प्रभावशाली आर्थिक गति हासिल की है। कि वह इस सम्मेलन से इसकी शुरुआत से जुड़े रहे हैं और समय के साथ इसकी गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि इस बार पहले की तुलना में कहीं अधिक देशों और प्रतिनिधियों की भागीदारी देखने को मिल रही है।

कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव की हुई तारीफ
न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री प्रो. जॉन गिब्सन ने कहा कि कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि यहां केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो रही है।

दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नियम-आधारित और अधिक व्यवस्थित आर्थिक सहयोग का उदाहरण है।

भारत में निवेश के अवसर अनुकूल
जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकॉनॉमिक्स के निदेशक काजुतो सुजुकी ने कहा कि आज के दौर में अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति और जियोइकॉनॉमिक्स एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव की विशेषता यही है कि यह केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उन भू-राजनीतिक कारकों पर भी चर्चा करता है जो आर्थिक फैसलों को प्रभावित करते हैं।

काजुतो सुजुकी ने कहा कि चीन के साथ जटिल संबंधों के चलते जापानी उद्योग लंबे समय से भारत को एक महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरे बाजार के रूप में देख रहे हैं।

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