नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना की। विश्व भर के अर्थशास्त्रियों ने भारत की विकास नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि सही नीतियों से भारत प्रमुख आर्थिक शक्ति बन सकता है।
हालांकि सम्मेलन में ‘बदलती दुनिया में वित्तीय स्थिरता बनाए रखना’ विषय पर बोलते हुए RBI Governor संजय मल्होत्रा ने 5 खतरों से आगाह किया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में कई नए जोखिम उभर रहे हैं जो अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
इन प्रमुख खतरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े साइबर जोखिम, बढ़ता वैश्विक कर्ज और वित्तीय बाजारों में लेवरेज शामिल हैं। विशेषज्ञों अनुसार इन अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के पास युवा आबादी, बुनियादी ढांचे में निवेश और डिजिटल बदलाव का अवसर है।
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 और भारत की आर्थिक प्रगति
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (KEC 2026) के दौरान वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने भारत की विकास यात्रा को बेहद सकारात्मक और मजबूत बताया।
स्वीडिश अर्थशास्त्री डेनियल वाल्डेनस्ट्रॉम अनुसार सतत विकास और शिक्षा जैसी नीतियों के बल पर भारत अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत अब अपनी आर्थिक वृद्धि को शिक्षा, बुनियादी ढांचे और जीवन स्तर में सुधार जैसे व्यापक सामाजिक लाभों में बदल रहा है।
AI तकनीक के साइबर जोखिम और वित्तीय बाजारों की चुनौतियां
विशेष संबोधन में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा हो रहे गंभीर खतरों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार से साइबर हमलों, मॉडल रिस्क और थर्ड पार्टी निर्भरता का जोखिम लगातार बढ़ रहा है।
RBI गवर्नर अनुसार अत्यधिक जुड़ी हुई वैश्विक वित्तीय प्रणाली में साइबर जोखिम किसी एक देश या सीमा तक सीमित नहीं रहते हैं। इसके अलावा AI सेक्टर में भारी निवेश के बाद अगर कमाई की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो वित्तीय बाजारों में तेज गिरावट आ सकती है।
बढ़ता वैश्विक कर्ज, बॉन्ड यील्ड और प्राइवेट क्रेडिट की समस्या
RBI गवर्नर ने दुनिया भर में लगातार बढ़ रहे सार्वजनिक और कॉरपोरेट कर्ज के स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कर्ज चुकाने की अवधि घटने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सरकारों के लिए उधारी बेहद महंगी होती जा रही है।
इससे कंपनियों पर कर्ज भुगतान का दबाव बढ़ेगा, बैंकों की बैलेंस शीट प्रभावित होगी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी बाहर जा सकती है। साथ ही हेज फंड और ETF द्वारा ज्यादा रिटर्न के लिए भारी कर्ज लेकर निवेश करने से वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो सकती हैं।
संजय मल्होत्रा ने प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर में उभरती चुनौतियों का जिक्र करते हुए हालिया बड़े डिफॉल्ट्स की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्राइवेट क्रेडिट में कमजोर होते ऋण मानक और संभावित चूक पूरी वित्तीय प्रणाली को अस्थिरता की ओर ले जा सकती हैं।
इन 5 बड़े वैश्विक खतरों के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास विकास दर बनाए रखने का बेहतरीन अवसर मौजूद है। युवा आबादी, बुनियादी ढांचे में निवेश और संस्थागत सुधारों पर निरंतर ध्यान देकर भारत दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्ति बन सकता है।
