नयी दिल्ली, 04 अक्टूबर (वार्ता) दिल्ली पुलिस ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दिल्ली के पीएचडी स्कॉलर की मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने बताया कि करीब 45 दिनों तक इलाज के बाद शनिवार को एम्स में उनकी मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में किशनगढ़ पुलिस स्टेशन में सेक्शन 108 बीएनएस (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि स्टूडेंट इस साल 18 अगस्त को साउथ वेस्ट दिल्ली के मुनिरका गांव में अपने किराए के घर पर बेहोश और घायल हालत में मिला था। स्कॉलर के कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद था, जिसे पड़ोसियों को तोड़ना पड़ा। पुलिस ने उसे तुरंत ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कर दिया।
पिछले 45 दिनों से ज़्यादा समय से उसका इलाज चल रहा था। इस मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों और आईआईटी दिल्ली के सुरक्षा अधिकारी से मिली शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।संबंधित अधिकारियों ने साफ किया है कि कहा जा रहा है कि यह घटना आईआईटी दिल्ली कैंपस के अंदर नहीं हुई थी।
इस बीच, अब तक की कार्रवाई के दौरान, मरने वाले के परिवार या गवाहों ने किसी पर कोई शक या आरोप नहीं लगाया, क्योंकि घायल उस समय घर में अकेला था, जो पुलिस के अनुसार, स्कॉलर के घर के बाहर लगे कैमरे के सीसीटीवी फुटेज के एनालिसिस से भी साफ था।
पुलिस ने कहा कि मामले में आगे की जांच और कार्रवाई चल रही है।
