कटोराताल में जमी काई और गंदगी, फिल्टर प्लांट भी बेअसर

ग्वालियर: स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कटोराताल को आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया था, लेकिन अब यहां सफाई और रखरखाव की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। तालाब के पानी में जगह-जगह काई और गंदगी जमा हो गई है। पानी की नियमित सफाई नहीं होने से इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
कटोराताल में पानी को साफ रखने के लिए फिल्टर प्लांट लगाया गया है, लेकिन इसके ठीक से काम नहीं करने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि फिल्टर प्लांट के मोटर में खराबी होने के कारण पानी की सफाई प्रभावित है। वहीं तालाब की सफाई के लिए लगाए गए उपकरण भी अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।
मेंटेनेंस पर खर्च, फिर भी बदहाल व्यवस्था:
कटोराताल में साउंड सिस्टम और लेजर शो का ठेका एक कंपनी के पास है, जबकि मेंटेनेंस का काम दूसरी कंपनी को सौंपा गया है। इसके बावजूद तालाब में काई और गंदगी का जमाव साफ दिखाई दे रहा है। आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर भुगतान होने के बावजूद नियमित सफाई और देखरेख नहीं हो पा रही है। तालाब की सतह पर जमा काई इतनी अधिक हो गई है कि दूर से ही दिखाई देती है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जब रखरखाव पर राशि खर्च की जा रही है तो फिर कटोराताल की स्थिति लगातार क्यों बिगड़ रही है।
टाइल्स उखड़ीं, लीकेज से पानी हो रहा बर्बाद:
कटोराताल परिसर में लगाई गई टाइल्स भी कई स्थानों से उखड़ने लगी हैं। टाइल्स टूटने के कारण तालाब में पानी का लीकेज होने की बात सामने आई है। पानी की सफाई के लिए लगाए गए फिल्टर प्लांट के प्रभावी तरीके से काम नहीं करने से स्थिति और गंभीर हो रही है। कटोराताल में पानी को साफ करने और बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद यदि पानी गंदा होता जा रहा है और लीकेज से पानी बर्बाद हो रहा है, तो जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जिम्मेदार अफसर नहीं पहुंच रहे निरीक्षण करने:
कटोराताल की बिगड़ती स्थिति के बावजूद संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सफाई, फिल्टर प्लांट की मरम्मत और लीकेज को ठीक नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में समस्या और बढ़ सकती है

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