ब्रह्मलीन स्वामी रामानंद सरस्वती के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि – महंत मंगलदास

ओंकारेश्वर। मार्कण्डेय संन्यास आश्रम में ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी रामानंद सरस्वती महाराज के अष्टादश निर्वाण महोत्सव पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। षड्दर्शन संत मंडल अध्यक्ष महंत मंगलदास महाराज ने कहा कि महाराज जी के बताए मार्ग और उपदेशों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।

स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने कहा कि इस आश्रम में गुरु कृपा, ईश्वर कृपा और आत्म कृपा मिलती है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें नर्मदा तट स्थित आश्रम में महाराज जी के सान्निध्य में पठन-पाठन और संन्यास ग्रहण का अवसर मिला।

स्वामी विद्यानंद महाराज, ऋषिकेश ने कहा कि ब्रह्मलीन महाराज में त्याग और कर्मयोग का भाव था, शरीर से कोई मोह नहीं था। महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद महाराज, हरिद्वार ने कहा कि वे कहते थे – सत्य धारण कर बोलो, झूठ मत बोलो और समय की कीमत करो।

महामंडलेश्वर स्वामी वीरागानंद महाराज, कैथल ने कहा कि धन्य वही जन्म है जिसका दोबारा जन्म न हो। उन्होंने परमानंद परमात्मा का साक्षात्कार कर अंत में सब त्याग कर गंगा तट पर मोक्ष पाया।

सभा में महंत सुरेंद्र गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद, महामंडलेश्वर स्वामी अनन्य देव वृंदावन, पत्रकार जयप्रकाश पुरोहित और प्रभाकर केरुलकर ने भी महाराज जी के जीवन संस्मरण सुनाए।

अंत में आश्रम अध्यक्ष स्वामी प्रणवानंद महाराज ने सभी संतों-भक्तों का आभार माना। इसके बाद संत भंडारा और भक्ति भंडारा हुआ, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।

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