नई दिल्ली, देशभर के दुकानदारों और व्यापारियों द्वारा 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के अवसर पर ‘No UPI Day’ के तहत अपने QR कोड और साउंड बॉक्स काले कपड़े से ढककर विरोध जताने का ऐलान किया गया था, जिसे अब आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) और ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) सहित प्रमुख व्यापारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की है। सरकार द्वारा व्यापारियों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर प्रस्तावित MDR शुल्क को लेकर थी चिंता, व्यापारियों ने रखी थीं चार बड़ी मांगें
गौरतलब है कि सरकार द्वारा आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लागू किए जाने की खबर के बाद व्यापारियों में रोष था। उनका कहना था कि पहले से ही कम मुनाफे वाले छोटे दुकानदारों पर यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ उनकी कमर तोड़ देगा। इसी के विरोध में महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स और CAIT समेत कई संगठनों ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार की थी। बैठक के दौरान व्यापारियों ने सरकार के सामने मांग रखी थी कि इस नियम को तुरंत लागू न किया जाए, इसकी सीमा बढ़ाई जाए और दुकानदारों के बीच होने वाले लेन-देन को इस शुल्क से पूरी तरह बाहर रखा जाए।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त बोझ, सरकार और बैंक्स एसोसिएशन मिलकर दूर करेंगे भ्रम
वित्त मंत्रालय और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने स्पष्ट किया है कि यह MDR चार्ज ग्राहकों से किसी भी रूप में नहीं वसूला जाएगा और यह पूरी तरह से बैंक तथा व्यापारी के बीच का मामला रहेगा। सरकार के मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत दुकानदारों और 70 प्रतिशत कुल UPI लेनदेन पर इस शुल्क का कोई असर नहीं पड़ेगा, साथ ही पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। वित्त मंत्री के आश्वासन के बाद अब बाजार में किसी भी प्रकार की हड़ताल नहीं होगी और व्यापार सामान्य रूप से संचालित होता रहेगा।

