गंदे पानी की आपूर्ति पर बड़ा एक्शन : कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अनुबंध निरस्त

सतना : शहर में नागरिकों को लंबे समय से मिल रहे बदबूदार और दूषित पेयजल की गंभीर समस्या पर आखिरकार नगर पालिक निगम ने कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाया है. शहर में स्वच्छ, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रहने तथा बार-बार चेतावनियों के बावजूद अपनी कार्यप्रणाली में सुधार न करने पर निगम प्रशासन ने गुजरात (अहमदाबाद) की चर्चित मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन व संधारण का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है. इस बड़ी कार्रवाई से निर्माण एजेंसियों और लापरवाह ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है.

नगर पालिक निगम द्वारा शहर के महत्वपूर्ण क्षेत्र यानी कोलगवाँ थाना के सामने स्थित 18 एमएलडी और 40 एमएलडी क्षमता वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के उन्नयन (अपग्रेडेशन), संचालन और संधारण का बहुमूल्य जिम्मा मेसर्स कृष्णा कन्स्ट्रक्शन कम्पनी को सौंपा गया था.

कंपनी ने निर्माण कार्य पूरा करने का दावा करते हुए 1 अक्टूबर 2025 से इन दोनों प्लांट्स का आधिकारिक संचालन शुरू किया था. शुरुआत में लोगों को उम्मीद थी कि शहरवासियों को बेहतर और साफ पानी मिलेगा, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत साबित हुई.

प्लांट के संचालन के शुरुआती दिनों से ही शहर के विभिन्न वार्डों में की जा रही जलापूर्ति पर गंभीर सवाल उठने लगे थे. तय मानकों के अनुसार स्वच्छ पानी मिलने के बजाय नागरिकों को अत्यधिक बदबूदार, मटमैला और दूषित पानी मिल रहा था जिसके इस्तेमाल से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था. शहरवासियों को इस गंदे पानी के कारण भारी परेशानियों और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा था.

नव भारत ने इस गंभीर जनसमस्या को लगातार कई महीनों तक अपनी सुर्खियों में प्रमुखता से स्थान दिया और लगातार प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया. मीडिया के इस कड़े रुख और जनदबाव के बाद आखिरकार नगर निगम प्रशासन ने हरकत में आकर यह सख्त कदम उठाया है.

लापरवाही, तकनीकी अक्षमता और रसायनों की कमी बनी मुख्य वजह

नगर निगम द्वारा मामले की गहराई से जांच कराई गई जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांच में सामने आया कि कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा प्लांट के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त अनुभवी, कुशल और तकनीकी रूप से सक्षम कर्मचारियों की सेवाएं नहीं ली जा रही थीं. इसके अलावा पानी के शुद्धिकरण के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले रसायनों को निर्धारित मात्रा में उपलब्ध कराने में भी कंपनी पूरी तरह नाकाम साबित हुई.
स्थिति यह थी कि आए दिन प्लांट की मशीनरी खराब हो रही थी और तकनीकी खराबी को सुधारने में अत्यधिक देरी की जा रही थी जिसकी वजह से शहर की जलापूर्ति बार-बार बाधित हो रही थी और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते नजर आए.

अंतिम चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, आखिरकार रद्द हुआ अनुबंध

कंपनी की इस लगातार लापरवाही और उदासीनता को देखते हुए नगर निगम ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए 15 सितंबर को कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी को अंतिम चेतावनी जारी की थी और तय समय-सीमा के भीतर व्यवस्था को पूरी तरह सुधारने के निर्देश दिए थे. निगम ने स्पष्ट किया था कि यदि जलापूर्ति की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो कठोर कार्रवाई की जाएगी. इसी आधार पर नगर निगम प्रशासन ने कड़ा निर्णय लेते हुए मेसर्स कृष्णा कन्स्ट्रक्शन कम्पनी का 40 एमएलडी और 18 एमएलडी प्लांट के संचालन का अनुबंध पूरी तरह निरस्त कर दिया है.

वैकल्पिक व्यवस्था में जुटा नगर निगम

अनुबंध निरस्त होने के बाद नगर निगम प्रशासन अब पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतर आया है. निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर के नागरिकों को जल्द से जल्द स्वच्छ, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं. इसके साथ ही प्लांट के संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार और प्रशासनिक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं ताकि शहरवासियों को इस बड़ी राहत मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न दोहराई जा सके

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