सिंगरौली : मोरवा विस्थापन की मांगों को लेकर एनसीएल मुख्यालय के घेराव के साथ शुरू हुआ आंदोलन देर रात तक जारी रहा। सुबह से भारी संख्या में पहुंच एनसीएल मुख्यालय के सभी गेटों पर तालाबंदी करते हुये 45 सूत्रीय मांगो को लेकर अड़ गये और आधी रात को धरना समाप्त हुआ।तकरीबन 12 घंटे चले दिनभर चले आंदोलन के बाद देर शाम एनसीएल पुनर्स्थापना सेल के महाप्रबंधक निरंजन रुक्मांगद आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे और मांगों पर बातचीत की।
उन्होंने आंदोलनकारियों द्वारा रखी गई 45 मांगों में से 22 मांगों पर सहमति जताई, जबकि शेष मांगों में से कई पर असहमति जताते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की आवश्यकता बताई। वहीं वार्ता के दौरान पुनर्स्थापना सेल के जीएम ने आंदोलनकारियों को बताया कि उनकी 45 मांगों में से 22 बिंदुओं पर प्रबंधन की सहमति है। इधर पूर्व विधायक रामलल्लू वैश्य ने भी आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए एनसीएल प्रबंधन पर विस्थापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की बात रखी।
शासकीय भूमि पर बसे लोगों का मुद्दा बना सबसे बड़ा विवाद
वार्ता में शासकीय भूमि पर बसे प्रभावित परिवारों को पट्टाधारकों के समान दर्जा देने की मांग पर सहमति नहीं बन सकी। यह मुद्दा आंदोलनकारियों के बीच भी सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय बना रहा। वहीं आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि सभी विस्थापित मंच एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं तो सभी प्रभावित परिवारों के अधिकारों को समान रूप से सामने रखा जाना चाहिए। वहीं प्रबंधन की ओर से इस विषय पर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा किए जाने की बात कही गई।
