नयी दिल्ली, 01 अक्टूबर (वार्ता) सरकार वस्त्र उत्पाद पर विदेशी निर्भरता को समाप्त करने के लिए सात से आठ न्यू एज फाइबर के उत्पादन में काम शुरू करने जा रही है।
यह जानकारी केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को यहां लघु लघु उद्योग भारती की ओर से आयोजित टेक्सटाइल कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा, “देश में करीब सात से आठ न्यू एज फाइबर के उत्पादन पर शीघ्र काम शुरू होगा जिससे विदेशों पर निर्भरता ख़त्म की जा सके।” इस दौरान उन्होंने बैम्बू, पाइनापल और केले के फाइबर जैसे अन्य वैकल्पिक उद्योगों के साथ स्वयं सहायता ग्रुप को जोड़ने पर बल दिया।
श्री सिंह ने कहा कि अमेरिका की ओर से लगाये गये आयात शुल्क के बावजूद सरकार ने 40 नये देशों को चिह्नित करके वस्त्र उत्पाद को बढ़ावा दिया, जिसके कारण देश के 548 जिलों से हथकरघा और हस्तशिल्प का दुनिया के 132 देशों में निर्यात किया गया।
उन्होंने बताया कि वस्त्र उद्योग देश में सर्वाधिक रोजगार सृजन करने वाला उद्योग है। वर्ष 2014 में इस सेक्टर का आकार 1380 लाख डॉलर का था जो मोदी सरकार के आने के बाद 1900 लाख डॉलर तक पहुँच गया जिसे वर्ष 2030 तक 3500 लाख डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य बनाया गया है। इसमें 2500 लाख डॉलर घरेलू स्तर पर और 1000 लाख डॉलर का निर्यात शामिल है।
इस दौरान विशेषज्ञों ने सुरक्षा, वैश्विक बाज़ार तक पहुँच, मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) के उपयोग और ब्रांड इंडिया, अनुसंधान एवं नवाचार पर एमएसएमई को लेकर श्री सिंह को कुछ सुझाव दिये, जिस पर श्री सिंह ने आश्वासन दिया कि उनकी अधिकांश सुझावों को मान लिया जायेगा तथा भविष्य में भी एमएसएमई उद्योगों की समस्याओं को प्राथमिकता पर हल किया जायेगा।
कॉन्क्लेव मंत्रा के निदेशक डॉ. पंकज गांधी ने वस्त्र प्रौद्योगिकी, तकनीकी वस्त्र एवं एमएसएमई विषय पर बोलते हुए कहा कि तकनीकी वस्त्रों का उपयोग अब पारंपरिक परिधानों तक सीमित न रहकर कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा, ऑटोमोबाइल, निर्माण, परिवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। भारत विश्व के प्रमुख तकनीकी वस्त्र बाजारों में शामिल है और इस क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान, स्वदेशी उत्पादन तथा निर्यात विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने तकनीकी वस्त्रों में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों एवं अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान यहां दिखाये गये वीडियो में अत्याधुनिक तकनीक, नए उत्पादों के विकास, आयात प्रतिस्थापन और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष प्रकाश डाला गया।
उन्होंने उद्योग-अकादमिक सहयोग और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस – टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (सीओई-टीआरए) मॉडल के माध्यम से एमएसएमई को तकनीकी सहायता, परीक्षण सुविधा, उत्पाद विकास तथा व्यवसायीकरण के अवसर उपलब्ध कराने की रूपरेखा प्रस्तुत की।
