भारत में स्टील कारोबार गंवाया, अब अमेरिका में उतरा रुइया परिवार; 18 अरब डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट, जानिए

नई दिल्ली। भारत के स्टील कारोबार में बड़ा नाम रहे रुइया परिवार ने अब अमेरिका में एक बड़े स्टील प्रोजेक्ट के जरिए इस क्षेत्र में नई पारी शुरू करने की तैयारी की है। एस्सार समूह की कंपनी मेसाबी मेटालिक्स अमेरिका में करीब 18 अरब डॉलर के निवेश से एक एकीकृत स्टील कारोबार विकसित कर रही है। इस योजना में आयोवा में करीब 15 अरब डॉलर का स्टील कॉम्प्लेक्स और मिनेसोटा में करीब 3 अरब डॉलर की लौह अयस्क खदान एवं पेलेट संयंत्र परियोजना शामिल है।

1969 में रखी गई थी एस्सार की नींव

रुइया परिवार की कारोबारी कहानी करीब छह दशक पुरानी है। 1969 में शशि रुइया और रवि रुइया ने एस्सार की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में समूह ने निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम किए। इसके बाद कारोबार का विस्तार स्टील, ऊर्जा, तेल, बंदरगाह और खनन जैसे क्षेत्रों तक हुआ।

रवि रुइया एस्सार के सह-संस्थापकों में रहे और समूह के विस्तार में उनकी अहम भूमिका रही। समय के साथ एस्सार ने भारत से बाहर भी कई कारोबार विकसित किए और एक वैश्विक औद्योगिक समूह के रूप में अपनी पहचान बनाई।

*2017 में आया बड़ा संकट*

तेजी से विस्तार के साथ समूह पर कर्ज का दबाव भी बढ़ा। एस्सार स्टील इंडिया अगस्त 2017 में दिवाला प्रक्रिया में गई। इसके बाद लंबी कानूनी और समाधान प्रक्रिया चली। आखिरकार 2019 में आर्सेलरमित्तल की करीब 42 हजार करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी मिली और एस्सार स्टील का स्वामित्व रुइया परिवार से बाहर चला गया।

इसके बाद एस्सार समूह ने कर्ज कम करने और अपने कारोबार को ज्यादा केंद्रित क्षेत्रों में व्यवस्थित करने पर जोर दिया। समूह ने ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, धातु एवं खनन और तकनीक-रिटेल जैसे क्षेत्रों को अपने मौजूदा कारोबार का प्रमुख हिस्सा बनाया।

*कौन हैं रेवंत रुइया?*

इस नई कहानी में अगली पीढ़ी के रेवंत रुइया की भूमिका अहम है। वे रवि रुइया के बेटे हैं और मेसाबी मेटालिक्स के चेयरमैन हैं। रेवंत समूह के धातु और खनन कारोबार से जुड़े हुए हैं और अमेरिका में चल रही नई स्टील परियोजना में नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं।

रेवंत की अमेरिका से जुड़ी कारोबारी भूमिका नई नहीं है। एस्सार ने 2007 में मिनेसोटा स्टील इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण किया था। यहीं से लौह अयस्क खदान और पेलेट परियोजना की योजना आगे बढ़ी, जो अब प्रस्तावित आयोवा स्टील कॉम्प्लेक्स के लिए कच्चे माल का आधार बनने जा रही है।

खदान से स्टील प्लांट तक एक ही श्रृंखला

नई योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका एकीकृत मॉडल है। मिनेसोटा से लौह अयस्क निकाला जाएगा, उसे पेलेट में बदला जाएगा और फिर आयोवा के प्रस्तावित स्टील कॉम्प्लेक्स में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, इस तरह अमेरिका में ही खदान से लेकर तैयार स्टील तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला तैयार होगी।

आयोवा परियोजना में शुरुआती तौर पर करीब 75 लाख टन सालाना स्टील उत्पादन की योजना है, जिसे आगे बढ़ाकर करीब एक करोड़ टन तक ले जाने का लक्ष्य है। उत्पादन 2030 के आसपास शुरू होने की योजना बताई गई है।

भारत के संकट से अमेरिका की नई शुरुआत तक

रुइया परिवार की कारोबारी कहानी में यह एक बड़ा बदलाव है। एक समय भारी कर्ज और स्टील कारोबार के संकट से जूझने के बाद परिवार ने अपने वैश्विक कारोबार को नए सिरे से व्यवस्थित किया। अब उसी परिवार की अगली पीढ़ी अमेरिका में खनन और स्टील को एक ही कारोबारी श्रृंखला में जोड़कर नया औद्योगिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रही है।

रवि रुइया के दशकों के कारोबारी अनुभव और रेवंत रुइया की अगली पीढ़ी की भूमिका के साथ एस्सार की यह परियोजना अब परिवार के लिए सिर्फ स्टील में वापसी नहीं, बल्कि अमेरिका में एक नए वैश्विक औद्योगिक कारोबार की शुरुआत भी है।

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