नयी दिल्ली, 30 सितंबर (वार्ता) केंद्र सरकार देश भर की 1,800 और पर्यटन परिसंपत्तियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रही है। संयुक्त पर्यटन सचिव हरि किशोर ने यहां उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा बुधवार को आयोजित राष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन से इतर समाचार एजेंसी ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि जनवरी से जून 2027 के बीच छह महीने में देश भर की 1,800 पर्यटन परिसंपत्तियों को डिजिटाइज करने की योजना है। इसके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
पर्यटन परिसंपत्तियों के डिजाइटाइजेशन का तात्पर्य उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने से है। इसके तहत उनकी पूरी जानकारी को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के साथ टिकटिंग, आसपास के इलाके की जानकारी, प्रबंधन आदि को भी डिजिटल बनाया जाता है। श्री किशोर ने उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां पहले ही डिजिटाइज हो चुकी है। इसका लाभ यह होता है कि पर्यटक अपनी यात्रा की योजना बनाने के चरण में ही उसके बारे में काफी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इससे उनकी यात्रा अधिक आसान हो जाती है।
उन्होंने कहा कि टूर एंड ट्रैवल कंपनियां भी इसमें प्लग-इन कर सकती हैं और अपने ग्राहकों को इसका लाभ दे सकती हैं।
कार्यक्रम में एक परिचर्चा के दौरान श्री किशोर ने कहा कि देश में पर्यटन के विकास के लिए पूरे पर्यटन क्षेत्र को चिकित्सा पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन जैसे हिस्सों में बांट कर सभी सेक्टर का विकास सुनिश्चित करना होगा। साथ ही मांग और विपणन को भी मजबूत बनाना होगा। वीजा ऑन अराइवल के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में गृह मंत्रालय में निदेशक (विदेशी) आर.डी. मीणा ने बताया कि सरकार ने 172 देशों के नागरिकों को ई-वीजा की सुविधा दी हुई है। ऑनलाइन वीजा आवेदनों में 95 प्रतिशत का निपटारा 24 घंटे के भीतर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वीजा ऑन अराइवल देने में यह परेशानी है कि उसमें आव्रजन अधिकारियों को यह पता नहीं होता कि आने वाला व्यक्ति कौन है। यदि किसी को देश में आने के बाद वापस भेजा जाए तो उसे अधिक परेशानी होगी।
थॉमस कुक हॉलीडेज के कार्यकारी उपाध्यक्ष रोमिल पंत ने कहा कि भारत को अपने पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने की बजाय अपनी संस्कृति, पहनावा, खान-पान आदि का प्रचार करना चाहिए। पर्यटक किसी स्मारक को देखने के कहीं अधिक उस अनुभव को तरजीह देता है जो उसे किसी देश में मिलता है। भारत में इतनी विविधता है जिसके लिए वैश्विक के साथ घरेलू मांग भी पैदा की जा सकती है।

