विदेश मंत्री एस. जयशंकर का दोटूक बयान, पड़ोसी देश से फैलने वाले आतंकवाद पर अमेरिकी रुख से भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ता है असर

नई दिल्ली,  संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के समापन के बाद वाशिंगटन में एशिया सोसाइटी द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। पूर्व अमेरिकी राजनयिक डैनियल रसेल के संचालन में हुई इस बातचीत के दौरान जब उनसे अमेरिका-भारत रिश्तों में आए हालिया उतार-चढ़ाव और व्यापारिक तनावों के बारे में पूछा गया, तो जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए आतंकवाद एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि हमारे रणनीतिक साझीदार देश आतंकवाद जैसी हमारी मुख्य प्राथमिकताओं और चिंताओं को पूरी तरह नहीं समझते हैं या उनकी गंभीरता को कम आंकते हैं, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।

वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच बढ़ते संपर्कों पर भारत की पैनी नजर, ट्रंप प्रशासन के रुख को लेकर विदेश मंत्री ने रखी हकीकत

हाल के महीनों में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक व सैन्य संपर्कों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को जिस तरह दशकों से पड़ोसी देश की प्रायोजित आतंकवाद नीति का सामना करना पड़ा है, वैसा दर्द शायद ही दुनिया के किसी अन्य देश ने झेला हो। पिछले साल जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से व्हाइट हाउस और पाकिस्तानी नेतृत्व (विशेषकर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर) के बीच बढ़ती नजदीकियों और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा मध्यस्थता के दावों पर भी भारत ने हमेशा अपनी असहजता और आपत्ति दर्ज कराई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता है, खासकर तब जब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन का रुख कई बार स्पष्ट नहीं होता।

संबंधों को बेहतर बनाने के लिए जमीनी वास्तविकताओं को समझना जरूरी, आपसी प्राथमिकताओं के सम्मान पर टिका है भविष्य

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच आपसी रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण हैं और हम निश्चित रूप से इन्हें और अधिक मजबूत एवं बेहतर होते देखना चाहते हैं। हालांकि, इसके लिए दोनों देशों को उन कड़वी जमीनी और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का सामना करना होगा जो वर्तमान में रिश्तों के बीच आड़े आ रही हैं। यदि अमेरिका और भारत आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर एक-दूसरे की संवेदनशीलता और सुरक्षा चिंताओं का पूरी तरह सम्मान करते हुए आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच की दूरियां कम होंगी और रणनीतिक साझेदारी को एक नया मुकाम मिलेगा।

Next Post

ईरान यदि परमाणु मुद्दों पर ठोस प्रस्ताव दे तो प्रतिबंध हटाने को तैयार ट्रंप, कतरी और पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत जारी

Wed Sep 30 , 2026
वाशिंगटन डीसी, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों और विवादित मुद्दों पर कोई ठोस और स्वीकार्य प्रस्ताव पेश करता है, तो अमेरिका […]

You May Like