रीवा: रीवा जिले में शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक की सडक़ें बदहाली का शिकार हो चुकी हैं, जिससे आम जनता और वाहन चालकों का सफर मुश्किलों से भर गया है. शहर की सबसे अहम मॉडल सडक़ पर बारिश के बाद गड्ढे और जलभराव की मार झेलने के बाद अब लोग धूल के घने गुबार का सामना करने को मजबूर हैं.
शहर की मॉडल सडक़ का हाल सबसे बुरा है. दिनभर उड़ती धूल के कारण वाहन तक साफ नहीं दिखाई देते, जिससे राहगीरों को आंखों में जलन और सांस की गंभीर समस्याएं हो रही हैं.
लोगों का कहना है कि सडक़ पर चलना दूभर हो गया है, दुकानों और घरों में धूल घुस रही है. हैरानी की बात यह है कि इस प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए खरीदी गई करीब डेढ़ करोड़ रुपये की आधुनिक मशीन नगर निगम कार्यालय परिसर में धूल फांक रही है. अगर इस मशीन का उपयोग किया जाता तो सडक़ों पर उड़ रही धूल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से मशीन शोपीस बनी हुई है. शहर की अन्य सडक़ों का हाल भी बुरा है, जहां कॉलेज चौराहा, शिवनगर रोड और सिरमौर चौराहे के फ्लाईओवर पर उखड़ी सडक़ का मलबा और गड्ढे छोटे वाहनों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं.
आए दिन दो पहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के बीच से भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही से सडक़ों पर दबाव और बढ़ रहा है. जिस वजह से नई बनी सडक़ें भी जल्दी उखड़ रही हैं. प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर सडक़ों की मरम्मत और धूल नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है.
