SIR पर कांग्रेस के आरोपों की खुली पड़ताल जरूरी, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद राहुल गांधी जवाब दें : जिलाध्यक्ष मकू परवाल 

आलीराजपुर. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच अब स्वयं चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। चुनाव आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार SIR से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि Form-6 से जुड़ी SIR घोषणा को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया है तथा कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी चुनावी नीति अथवा SIR से संबंधित नहीं था।

ऐसे में आलीराजपुर जिले के भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी से सीधे सवाल करते हुए कहा है कि जब देश की संवैधानिक संस्था स्वयं पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी है, तब भी पुराने आरोपों को दोहराकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास किस आधार पर किया जा रहा है?

SIR किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की अपनी आधिकारिक प्रेस नोट में स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को SIR संबंधी आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। बाद में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी कार्यक्रमों को भी आयोग की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने यह भी कहा कि 27 मई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में बिहार SIR से संबंधित आदेश को बरकरार रखा गया।

ऐसे में सवाल यह है कि जब निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि निर्णय किसी एक अधिकारी अथवा एक व्यक्ति का नहीं बल्कि आयोग के स्तर पर सर्वसम्मति से लिया गया था, तो कांग्रेस किस आधार पर इसे लेकर अलग-अलग दावे कर रही है?

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक संस्था पर आरोप क्यों?

भाजपा जिलाध्यक्ष मकू परवाल ने कहा कि SIR को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए गए कई सवाल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सामने आए। लेकिन बाद में निर्वाचन आयोग ने संबंधित मुद्दों पर अपना स्पष्टीकरण जारी किया।

श्री परवाल ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सवाल पूछना अपने आप में असामान्य नहीं है, लेकिन किसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाने से पहले उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों की जांच करना भी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरी बाई खरत ने कहा कि अब जब चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्पष्टीकरण दे दिया है, तो कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह आयोग के आधिकारिक जवाब को स्वीकार करती है अथवा अपने पूर्व आरोपों को ही अंतिम सत्य मानती है।

Form-6 पर भी चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

सांसद श्रीमती अनिता चौहान ने कहा कि Form-6 को लेकर भी काफी राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के दौरान Form-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र की व्यवस्था लागू है और आयोग के अनुसार यह घोषणा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखी गई है। आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी SIR-2026 के अंतर्गत Form-6 और Declaration Form अलग-अलग उपलब्ध हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में बिहार SIR की वैधानिकता और प्रक्रिया से जुड़े प्रश्नों पर विचार किया गया था। ऐसे में कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह न्यायपालिका के निर्णय और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को किस रूप में देखती है।

कांग्रेस द्वारा तथाकथित पत्र को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर आयोग ने स्थिति की स्पष्ट

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजारीबाग करत एवं सांसद श्रीमती अनीता चौहान ने कहा कि विपक्ष द्वारा एक तथाकथित पत्र को लेकर जिस तरह भ्रम फैलाया जा रहा था, उस पर चुनाव आयोग ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। आयोग ने साफ किया है कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीति अथवा आईटी प्रभाग से संबंधित नहीं था। यह मामला प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए एक अधिकारी से जुड़ा आंतरिक प्रशासनिक विषय था। आयोग ने स्पष्ट किया कि उक्त पत्र का न तो किसी नीतिगत निर्णय से कोई संबंध था और न ही यह SIR (Special Intensive Revision) से जुड़ा हुआ था। श्री मुवेल ने कहा कि स्पष्ट स्थिति होने के बावजूद कांग्रेसी इस प्रशासनिक विषय को SIR से जोड़कर राजनीतिक भ्रम पैदा करना तथ्यों के विपरीत है।

कांग्रेस को आत्ममंथन की आवश्यकता

भाजपा जिला मीडिया प्रभारी गोविंदा गुप्ता ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। चुनाव, लोकतंत्र में जनादेश का माध्यम हैं। राजनीतिक दल जनता के बीच जाकर अपने काम, नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर समर्थन मांगते हैं। ऐसे में प्रत्येक चुनावी पराजय या राजनीतिक चुनौती का जवाब केवल चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर नहीं दिया जा सकता। राजनीतिक दलों के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपने संगठन, नीतियों, जनसंपर्क और जनता के बीच स्वीकार्यता का आत्ममंथन करें। कांग्रेस के लंबे चुनावी इतिहास में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने का तथ्य भी राजनीतिक आत्ममंथन का विषय हो सकता है।

जनता को भ्रम नहीं, स्पष्ट तथ्य चाहिए

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। इसके संबंध में राजनीतिक बहस हो सकती है, सवाल उठ सकते हैं और सुधार के सुझाव भी दिए जा सकते हैं। बहस तथ्यों पर होनी चाहिए किंतु कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है।

कांग्रेस और राहुल गांधी से पांच सीधे सवाल

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी से पांच सीधे सवाल पूछे हैं—

पहला सवाल —

जब चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR से जुड़े निर्णय आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए, तो राहुल गांधी अपने पूर्व आरोपों पर किस आधार पर कायम हैं?

दूसरा सवाल —

जब चुनाव आयोग ने Form-6 से जुड़ी SIR घोषणा के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख करते हुए स्थिति स्पष्ट कर दी है, तो क्या कांग्रेस न्यायपालिका के निर्णय को स्वीकार करती है?

तीसरा सवाल —

क्या किसी मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाना और बाद में उसी रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों का आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बावजूद आरोप दोहराना उचित है?

चौथा सवाल —

क्या कांग्रेस चुनाव आयोग और देश की अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता एवं संस्थागत भूमिका पर विश्वास करती है?

पांचवां सवाल —

यदि चुनाव आयोग ने अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट कर दिया है, तो क्या राहुल गांधी अपने पूर्व आरोपों की समीक्षा कर देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे?

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