मुंबई, 28 सितंबर (वार्ता) टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की अनिवार्यता से बचाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को एक प्रस्ताव दिया है जिसे अपनाए जाने के बाद टाटा संस न तो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी रह जाएगा और न ही कोर निवेश कंपनी।
टाटा ट्रस्ट्स की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उसने टाटा संस में ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ (टीईएसएस) और ‘टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स’ (टीसीई) के विलय का प्रस्ताव रखा है। साल 2004 तक लगातार 80 साल कंपनी के पास परिचालनरत कारोबार और परिचालन राजस्व रहा था। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 2004 तक टाटा संस का एक बिजनेस डिविजन थी। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “प्रस्तावित पुनर्गठन के परिणामस्वरूप टीएसपीएल अपने पुराने ऑपरेटिंग मॉडल पर वापस आ जाएगी, जिसमें टाटा ग्रुप के लिए होल्डिंग कंपनी होने के साथ-साथ इसके अपने कामकाज और राजस्व भी होंगे।”
टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के निदेशक मंडल को प्रस्ताव पर विचार करने और उसे मंज़ूरी देने तथा इसके लिए जरूरी कदम उठाने के लिए लिखा है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि टीईएसएस और टीसीई के विलय के बाद टाटा संस का कुल परिचालन राजस्व 1,05,043 करोड़ रुपये होता। यह वित्तीय परिसंपत्ति से प्राप्त 40,072 करोड़ रुपये की आय से कहीं अधिक है। इस प्रकार उसकी मुख्य कमाई परिचालन राजस्व से होने के कारण वह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) नहीं रह जाती। इसके साथ ही, नयी कंपनी की कुल परिसंपत्ति 2,00,158 करोड़ रुपये में से ग्रुप कंपनियों में निवेश 1,77,120 करोड़ रुपये का होता जो कोर निवेश कंपनी की अर्हता के लिए जरूरी 90 प्रतिशत से कम होता। इस प्रकार वह कोर निवेश कंपनी भी नहीं रह जाती।
उल्लेखनीय है कि टाटा संस ने कोर निवेश कंपनी के रूप में उसका पंजीकरण रद्द करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास आवेदन दिया था। हालांकि आरबीआई ने देश के शीर्ष एनबीएफसी की सूची में एक बार फिर टाटा संस को शामिल कर लिया है। इस प्रकार, उसके लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। यदि टाटा ट्रस्ट्स के प्रस्ताव को स्वीकार कर भी लिया जाता है तो एक एनबीएफसी में गैर-वित्तीय कंपनी के विलय के लिए आरबीआई की अग्रिम मंजूरी की आवश्यकता होगी। टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि प्रस्तावित पुनर्गठन और अनुपालन के लिए यह योजना टाटा समूह और उसके हितधारकों के “सर्वोत्तम हित” में होगा। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह टाटा संस के साथ मिलकर प्रस्तावित पुनर्गठन के सभी पहलुओं पर आरबीआई के साथ बातचीत करेगा।
