भोपाल:ऐसा प्रदेश जहां विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि तकनीकि और व्यवसायिक ज्ञान के साथ व्यवहारिक दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली शिक्षा के साथ हुनर और कौशल विकास को जोड़ने के अभियान में मप्र में अब तक कुल 5 लाख 98 हजार 452 नामांकन किये जा चुके हैं. वहीं करीब 40 प्रतिशत स्कूलों में व्यावसायिक कौशल के विषयों को जोड़ दिया गया है. जिससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने भविष्य की नींव आज से ही मजबूती के साथ ढाल रहे हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, यू-डायस प्लस और राज्य के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार रोजगार उन्मुख क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए मप्र ने देश भर में पहले पायदान पर अपनी जगह बना ली है. हालांकि देश भर कुल 15 हजार से अधिक सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम स्वीकृत किए गये हैं। जिसमें सबसे अधिक स्वीकृत स्कूलों में से सबसे बड़ा हिस्सा मप्र के पास है। वहीं प्रदेश में करीब 16 लाख से अधिक विद्यार्थी कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक के नामांकित हैं. जिसमें मप्र के कुल 3 हजार 367 स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित हैं। बता दें शिक्षा बजट को वर्ष 2002-03 के 2 हजार 456 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 36 हजार 582 कर दिया गया है ताकि स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रैक्टिकल लैब का तेजी से विकास हो सके।
-40 प्रतिशत स्कूलों में पाठ्यक्रम शुरू, 60 प्रतिशत में काम जारी
मप्र में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के करीब 40 प्रतिशत स्कूलों व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित हैं. वहीं करीब 60 प्रतिशत स्कूलों को आगामी चरणों में इस योजना से जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। हालांकि राजधानी भोपाल की बात करें तो 85 से अधिक शासकीय हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। जिसमें 9वीं से 12वीं के लगभग 30 हजार से अधिक छात्र इस योजना के तहत अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन विषयों में सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, सौंदर्य और कल्याण, खुदरा व्यापार और ऑटोमोटिव जैसे क्षेत्रों को विद्यार्थी सबसे अधिक चुन रहे हैं.
सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ मिलेगा उद्योग प्रशिक्षण
शिक्षाविद शैलेन्द्र भदौरिया अनुसार व्यावसायिक शिक्षा बच्चों को काम के ज़रूरी हुनर सिखाकर नौकरी मिलने के अवसर को बढ़ाती है। यह पढ़ाई किताबों के ज्ञान को सीधे कंपनियों की ज़रूरत से जोड़ती है और छात्रों को काम सीखने का मौका देती है। इसके माध्यम से छात्र सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, खुदरा व्यापार, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और ब्यूटी और वेलनेस जैसे कई व्यावसायिक विषयों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। जिससे उन्हें सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ प्रयोगशाला और उद्योग प्रशिक्षण मिल रहा है। वहीं 12वीं पास करने के बाद छात्र किसी भी संस्थान में अप्रेंटिसशिप कर सकते हैं या स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
