सतना : शहर में नगर निगम लगभग 35 हजार से अधिक उपभोक्ताओं से हर महीने जल कर के रूप में लाखों रुपये वसूलने के बावजूद, शहरवासियों को शुद्ध और नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. हैरानी की बात यह है कि जल प्रदाय विभाग हर महीने लाखों के मुनाफे में चल रहा है लेकिन इसका फायदा जनता को बुनियादी सुविधाओं के रूप में नहीं मिल रहा है. नलों से गंदा पानी आने और आए दिन सप्लाई बाधित रहने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है.
17 लाख के मुनाफे पर नगर निगम
मिली जानकारी अनुसार नगर निगम शहर के 35 हज़ार से अधिक घरों से हर महीने लगभग 57 लाख रुपए जल कर के रूप में वसूल रहा है. वहीं पानी के शुद्धिकरण, बिजली और रखरखाव आदि पर निगम का मासिक खर्च लगभग 40 लाख रुपए है. नगर निगम हर महीने करीब 17 लाख रुपए के शुद्ध लाभ में चल रहा है. इसके बावजूद मुनाफे की यह राशि पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने में खर्च होती नहीं दिख रही है.
अशुद्ध पानी और बाधित सप्लाई से जनता बेहाल
जल कर भरने के बाद भी नगर निगम शहरवासियों अशुद्ध और मटमैला पानी मिल रहा है. नगर वासियो ने सैकड़ो शिकायते कि की नलों से आने वाला पानी कई बार सीधे पीने योग्य नहीं होता जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है. वही आए दिन तकनीकी खराबी, मोटर जलने या पाइपलाइन लीकेज के नाम पर पानी की सप्लाई अघोषित रूप से बाधित कर दी जाती है. नियमित सप्लाई न होने के कारण नगरवासियों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और उन्हें मजबूरन निजी पानी के टैंकरों या बोतलबंद पानी पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ रहा है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब वे ईमानदारी से पानी का बिल भर रहे हैं और निगम मुनाफे में है तो उन्हें साफ और नियमित पानी क्यों नहीं मिल रहा? शहरवासियों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए और जल कर से होने वाले मुनाफे का उपयोग पेयजल वितरण प्रणाली को आधुनिक और सुचारू बनाने में किया जाए जिससे नियमित पानी मिल सके
