
न्यूयॉर्क, 26 सितंबर (वार्ता) भारत और लाइबेरिया ने प्रमुख वैश्विक समुद्री मार्गों में वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के बीच जलयानों और नाविकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक नयी अंतर्राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सप्ताह के इतर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन द सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफॉरर्स’ की उद्घाटन बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पत्रकारों से कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले का “कानूनी और नैतिक रूप से समर्थन नहीं किया जा सकता” है।
श्री जयशंकर ने कहा, “ऐसी हिंसा और जनहानि का कोई औचित्य नहीं हो सकता। सीधे शब्दों में कहें तो ये हमले हर हाल में बंद होने चाहिए।”
भारत और लाइबेरिया के संयुक्त नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल में प्रमुख नाविक-आपूर्ति करने वाले, शिपिंग और जहाज-मालिक हितों वाले देश एक साथ आए हैं। श्री जयशंकर के अनुसार, इस समूह की पहली बैठक में 25 देशों ने भाग लिया।
गौरतलब है कि भारत नाविकों का एक प्रमुख स्रोत देश है, जबकि लाइबेरिया के पास टन भार के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा शिपिंग रजिस्टर है। इसलिए दोनों देशों ने नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुखता से रखने के लिए यह व्यापक गठबंधन बनाने का प्रयास किया है।
विदेश मंत्री ने वैश्विक मर्चेंट बेड़े का संचालन करने वाले लगभग 20 लाख नाविकों के सामने मौजूद खतरों को बताया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य, खाड़ी, लाल सागर और काला सागर तक फैले सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री श्रमिकों के सामने मौजूद जोखिमों के प्रति उदासीन नहीं रह सकता।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि समुद्री परिवहन से वैश्विक व्यापार का लगभग चार-पांचवां हिस्सा संचालित होता है। श्री जयशंकर ने कहा कि पिछले वर्ष वैश्विक व्यापार लगभग 35 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। यह संख्या प्रमुख समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के महत्व को दर्शाती है।
भारत और लाइबेरिया इस समूह के सह-अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे। यह समूह एक समावेशी, स्वैच्छिक और कार्रवाई-उन्मुख मंच के रूप में काम करेगा, जिसका ध्यान सदस्य देशों और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग पर केंद्रित होगा। इसके सदस्य संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन सहित अंतर्राष्ट्रीय मंचों के माध्यम से साझा चिंताओं को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे।
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया ऐसे संघर्षों का सामना कर रही है जो भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नया समूह जहाजों और नाविकों की सुरक्षा में सार्थक बदलाव लाएगा।
