वर्धमान, (वार्ता) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि एंटी-गुंडा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा बिना मंजूरी के वापस लौटाए जाने के बाद राज्य सरकार इसके कानूनी प्रावधानों की जांच करेगी और नए मसौदे पर काम करेगी।
वर्धमान में एक प्रशासनिक बैठक के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए श्री अधिकारी ने कहा कि सरकार प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद अगला कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, “एंटी-गुंडा कानून चार अन्य राज्यों में अस्तित्व में है। हम कानूनी तरीकों से काम करेंगे। कोई कठिनाई नहीं होगी।” उन्होंने कहा कि कानूनी प्रावधानों को देखने के बाद इस विधेयक को प्रभावी बनाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026’ (जिसे आमतौर पर एंटी-गुंडा बिल के रूप में जाना जाता है) को बिना अपनी स्वीकृति दिए राज्य सरकार को वापस लौटा दिया।
जून में पारित हुए इस विधेयक का उद्देश्य संगठित अपराध, बार-बार अपराध करने वालों और सार्वजनिक अव्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार को व्यापक अधिकार प्रदान करना है। इस कानून के माध्यम से निवारक हिरासत और संपत्ति जब्ती जैसे उपायों के जरिए सिंडिकेट, जबरन वसूली रैकेट, भूमि कब्जा, अवैध खनन और राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाने का प्रयास किया गया है।
विधेयक वापस होने पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “पोस्टर पर डबल इंजन, काम में रिवर्स गियर! होमवर्क वापस हुआ, सुधार का आदेश दिया गया।” इस आलोचना का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “जिसे जो कहना है कहने दें। गुंडे अब डरे हुए हैं, इसीलिए वे ऐसी बातें कर रहे हैं। बाकी हम संभाल लेंगे। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि गुंडे डर में रहें और जेल जाएं। मैंने अब तक जो कुछ भी कहा है वह हुआ है, और आगे भी होगा।”
