एपीडा ने कर्नाटक से मालदीव के लिए जीआई-टैग प्राप्त ‘गुलबर्गा तूर दाल’ के निर्यात को दी हरी झंडी

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (वार्ता) कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने कर्नाटक से मालदीव के लिए जीआई-टैग (भौगोलिक संकेत) प्राप्त ‘गुलबर्गा तूर दाल’ की एक टन की पहली खेप को रवाना किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के विशिष्ट कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना और किसान उत्पादक संगठनों की निर्यात में भागीदारी बढ़ाना है।

यहां शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस निर्यात से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जहां स्थानीय थोक बाजार में तूर दाल की कीमत 60 प्रति रुपये किलोग्राम चल रही है, वहीं इस निर्यात माध्यम से किसानों को 82 रूपये प्रति किलोग्राम का भाव मिला है। यह प्रचलित बाजार मूल्य से 30 प्रतिशत से भी अधिक है। मैसूर की फर्म ‘मैसर्स सिल्कन ग्लोबल एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स’ द्वारा अपने एफपीओ-ब्रांड के तहत भेजी गई यह खेप समुद्री मार्ग से मालदीव पहुंचेगी।

कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) क्षेत्र में उगाई जाने वाली इस दाल को वर्ष 2019 में जीआई टैग मिला था। यह दाल अपने अनूठे स्वाद और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। कलबुर्गी राज्य में अरहर (तूर) पैदावार का एक प्रमुख केंद्र है और यह दाल इस क्षेत्र की कृषि पहचान का प्रतिनिधित्व करती है। एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव की उपस्थिति में इस खेप को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जीआई-टैग प्राप्त कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ले जाना किसानों के लिए नए अवसर खोलेगा। इस निर्यात से मालदीव को नियमित आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है, जिससे कर्नाटक के दाल उत्पादकों और निर्यातकों के लिए टिकाऊ बाजार और बेहतर मूल्य सुनिश्चित हो सकेगा।

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