भोपाल: लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर अब प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को भोपाल मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति दी है। हालांकि, इसे अभी अंतिम मास्टर प्लान की मंजूरी नहीं माना जा सकता।सड़क और लैंड यूज में क्या होगा बदलाव?
प्रस्तावित प्लान में सड़क की चौड़ाई के आधार पर लैंड यूज और व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने के प्रावधान बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों से जुड़े कुछ क्षेत्रों में मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान प्रस्तावित है। इससे तय नियमों के तहत कुछ जगहों पर आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की अनुमति का रास्ता बन सकता है।
कारोबार और पार्किंग पर भी फोकस
मास्टर प्लान में व्यावसायिक गतिविधियों और पार्किंग को लेकर नियमों को अधिक स्पष्ट किए जाने की बात है। अस्पताल, नर्सिंग होम और शॉपिंग सेंटर जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग व्यवस्था को लेकर प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
वहीं, रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के विपरीत चल रही व्यावसायिक गतिविधियां केवल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट से अपने आप वैध नहीं होंगी। मौजूदा नियमों के उल्लंघन पर संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।
नई सड़कें और विकास क्षेत्र
मास्टर प्लान-2047 का उद्देश्य भोपाल के भविष्य के शहरी विकास, सड़क नेटवर्क, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों तथा अन्य भूमि उपयोग को एक नियोजित ढांचे में लाना है। हालांकि, किस इलाके में नई सड़क बनेगी, किस जमीन का लैंड यूज बदलेगा या कौन-सी गतिविधि कहां अनुमत होगी, इसकी अंतिम तस्वीर आधिकारिक ड्राफ्ट सामने आने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि 21 साल से लंबित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आगे बढ़ने की स्थिति में है, लेकिन इसे अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
