न्यूयार्क, 23 सितंबर (वार्ता) अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने दुनिया भर में स्मॉल मॉड्युलर न्यूक्लियर रिएक्टर्स के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक ‘क्रियान्वयन योजना’ की घोषणा की है।
न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर आयोजित एक त्रिपक्षीय मंत्री स्तरीय बैठक के बाद आई यह घोषणा इस साल की शुरुआत में अंकारा में हस्ताक्षरित एक त्रिपक्षीय समझौते को और गहरा करती है, क्योंकि वाशिंगटन और उसके सहयोगी वैश्विक परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने की होड़ में हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह नई योजना 7 जुलाई को तीनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित “अन्य देशों में स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर (एसएमआर) की तैनाती पर सहयोग ज्ञापन ” पर आधारित है। विदेश विभाग ने कहा कि यह समझौता बढ़ती वैश्विक ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए एसएमआर की तैनाती के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी एजेंडा निर्धारित करके तीन देशों के पारस्परिक सुरक्षा हितों का समर्थन करता है।
इसके अलावा, अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडो की मौजूदगी में एक प्रमुख औद्योगिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते में चार दिग्गज कंपनियां-अमेरिका की ‘जीई-वेर्नोवा’, जापान की ‘हितैची’, दक्षिण कोरिया की ‘सैमसंग सीएंडटी’ और पोलैंड की ‘एसजीई’ पूरे यूरोप में ‘ बीडब्लयूआरएक्स-300’ स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर डिजाइन को संयुक्त रूप से तैनात करने के लिए एक साथ आई हैं।
चारों देशों के इस औद्योगिक कंसोर्टियम का लक्ष्य यूरोप भर में लाखों लोगों को विश्वसनीय परमाणु ऊर्जा प्रदान करना है, जिससे आने वाले वर्षों में रिएक्टर निवेश में 150 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित हो सकता है। वाशिंगटन ने इस कॉरपोरेट साझेदारी को इस बात का प्रमाण बताया कि सहयोगी देश परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के उच्चतम मानकों को पूरा करने वाले रिएक्टरों की तैनाती में तेजी लाने के लिए एक-दूसरे की औद्योगिक शक्तियों का लाभ उठा सकते हैं। यह कदम वैश्विक परमाणु रिएक्टर निर्यात में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के अमेरिकी प्रयासों का हिस्सा है।
