आशीर्वाद का दीया जलाने को लेकर लगी रही होड़ 

दिल्ली डायरी 

 

प्रवेश कुमार मिश्र 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर भाजपा द्वारा आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत देशभर में आशीर्वाद का दीया जलाने की इस राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान भाजपा शासित विभिन्न राज्यों में जलाने की जबरदस्त प्रतिस्पर्धा और होड़ देखने को मिली. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस अभियान के तहत किए जा रहे दावों को लेकर जबरदस्त चर्चा है. दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में 5 करोड़ 36 लाख और मध्य प्रदेश के 845 ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित स्थलों पर कुल 3 करोड़ 55 लाख से अधिक दीये रोशन किए गए. मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में शिप्रा नदी के तट पर एक साथ 33 लाख 27 हजार दीये जलाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा किया गया है. इसके अलावा गुजरात के 18,500 से अधिक स्थानों पर तथा राजस्थान के लगभग 500 प्रमुख स्थानों पर दीया जलाने का कार्यक्रम हुआ जिसमें जयपुर के सिर्फ अल्बर्ट हॉल में पचास हजार दीया जलाए गए. इसके साथ-साथ बिहार में भी संगठित रूप से 21 लाख से अधिक दीपक प्रज्वलित किए गए.

सिंबल फिसलने के बाद कांग्रेसी हाथ का सहारा

कल तक एकला चलो रे के नारे के साथ दिल्ली से लेकर कोलकाता तक हुंकार भरने वाली टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को झटका देते हुए चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस का नाम और उनका वह ऐतिहासिक जोड़ा फूल प्रतीक फ्रीज किए जाने के बाद जिस अपनापन के साथ राहुल गांधी ने खुद आगे बढ़कर ममता की ओर मदद का हाथ बढ़ाया उसको लेकर दिल्ली में जबरदस्त चर्चा है. क्योंकि लगभग 28 साल पहले 1998 में जिस कांग्रेसी हाथ को झटककर ममता ने स्वाभिमान की एक नई इबारत लिखी थी, उसी दीदी को आज इस विपरित परिस्थितियों में अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए पुराने कांग्रेसी हाथ का सहारा लेना पड़ रहा है. पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर के आगामी विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले आई इस भारी राजनीतिक आपदा के बीच राहुल ने न सिर्फ चुनाव आयोग के इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताया, बल्कि संकट की इस घड़ी में दीदी को पूरा वैचारिक और राजनीतिक संबल भी दिया है.

उप्र व पंजाब का सियासी पारा चढ़ा 

आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही उत्तर प्रदेश और पंजाब, दोनों राज्यों का सियासी पारा इस सप्ताह अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है. उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक भाजपा के दिग्गज भी मैदान में उतर चुके हैं. भाजपाई रणनीतिकार जहां राज्यों की राजनीति को संभागों में बांटकर जमीनी स्तर की तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सपा व कांग्रेस सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने की कोशिश के साथ अपने समर्थकों व वोटरों के मनोबल बढ़ाए रखने के लिए ब्लाक स्तरीय मास्टर प्लान तैयार कर रहे हैं ताकि भाजपाई दबाव में व्यवस्था बिखरे नहीं. इसी तरह पंजाब में भाजपा अपनी जमीनी वजूद को जानने के बाद भी अंतिम समय तक स्थानीय समीकरणों व मुद्दों के सहारे अपने पक्ष में माहौल बदलने के प्रयास में लगी है. इसके लिए लगातार केन्द्रीय मंत्रियों व पार्टी के वरिष्ठ नेता दौरा कर रहे हैं. दिल्ली के केन्द्रीय कार्यालय से दोनों राज्यों के लिए बाथरूम बनाकर सुक्ष्म स्तर की तैयारियों पर नजर रखी जा रही है. जबकि आम आदमी पार्टी सत्ता बचाए रखने के लिए डोर टू डोर कैंपेन आरंभ कर रही है और कांग्रेस आपसी गुटबाजी समाप्त कर एकजुटता के साथ आगे बढ़ना आरंभ कर रही है.

छात्रों पर पकड़ बनाने की कोशिश

देश के जेन-जी और युवा मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए भाजपा और कांग्रेस के दिल्ली में बैठे रणनीतिकार एक दूसरे की काट के लिए अलग-अलग रणनीति बनाने में जुटे हैं. इसी वजह से छात्रों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर एक बेहद आक्रामक और रणनीतिक महासंग्राम छिड़ चुका है. दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों ने यह भली-भांति समझ लिया है कि आने वाले समय में सत्ता की चाबी इसी युवा आबादी के हाथ में रहने वाली है ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों को जोड़ने के लिए एकदम नई नई रणनीतियाँ तैयार की जा रही है. कांग्रेस ने कोटा, प्रयागराज, देहरादून, पुणे और हाल ही में इंदौर के सफल आयोजन के बाद पच्चीस और बड़े शहरों को इस तरह के आयोजन के लिए चिन्हित किया है. इस अभियान के तहत 2029 तक सौ से ज्यादा शहरों में छात्रों की गुंज कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है. जबकि दूसरी ओर भाजपा ने युवाओं के बीच अपनी संवाद शैली को पूरी तरह री-डिजाइन कर दिया है. पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर एकतरफा संदेश देने के बजाय दो तरफा संवाद पर केंद्रित हो रही है. भाजपा देशभर में ऐसी युवा टीमें गठित कर रही है जो युवाओं की ही भाषा और शैली यानी रील्स और इंटरेक्टिव कंटेंट में सरकार की नीतियों को उन तक पहुँचाएंगी. साथ ही वैचारिक स्तर पर भाजपा समर्थित संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा, स्टार्टअप कल्चर, नए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकसित भारत की परिकल्पना को छात्रों के सामने रख रहे हैं.

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