न्यूयॉर्क। दुनिया में जब युद्ध और बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट सामने आते हैं, तो उम्मीद संयुक्त राष्ट्र यानी UN से की जाती है। लेकिन यूक्रेन से लेकर गाजा तक के संकटों ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और उसकी सीमाओं पर सवाल खड़े किए हैं। खास तौर पर सुरक्षा परिषद के वीटो सिस्टम को लेकर बहस तेज है, जहां अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस में से किसी एक स्थायी सदस्य के विरोध से प्रस्ताव रुक सकता है।
1945 में बनी वैश्विक व्यवस्था और आज की बदलती दुनिया के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी जैसे देश संयुक्त राष्ट्र में सुधार और सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग करते रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या UN बदलती वैश्विक ताकतों और नई चुनौतियों के अनुरूप खुद को बदल पाएगा?
