यूएन महासभा में ट्रंप ने कहा किसी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे

संयुक्त राष्ट्र (न्यूयार्क), 22 सितंबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 51 वर्षों से ईरानी शासन ने पूरे पश्चिम एशिया और उससे आगे हिंसा, अराजकता और तबाही फैलाई है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए श्री ट्रम्प ने अंतरराष्ट्रीय नीति, क्षेत्रीय विवादों और वैश्विक संस्थाओं को लेकर अपनी बात रखी और इसमें उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, गाजा में शांति समझौते, वेनेजुएला के साथ हुए ऐतिहासिक तेल सौदे और संयुक्त राष्ट्र में किए गए प्रशासनिक सुधारों का प्रमुखता से उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ईरानी शासन ने अपने परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद के समर्थन को समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकराकर बहुत बड़ी गलती की है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि पद संभालने के पहले दिन से ही उनका संकल्प अडिग रहा है और वे किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने ईरान को आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक करार देते हुए कहा कि वह अब मध्य पूर्व का दादा नहीं रहा। ईरान पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन के जखीरे के पीछे छिपकर तेजी से परमाणु बम बनाने की दिशा में बढ़ रहा था, लेकिन अमेरिका ने उसकी इस खतरनाक कोशिश को नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि वे इसमें सफल हो जाते, तो यह दुष्ट शासन परमाणु विनाश के हथियार के बल पर दुनिया भर में बेखौफ तबाही और मौत फैलाने के लिए स्वतंत्र हो जाता।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तनाव घटाने के अपने तरीकों का उल्लेख करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों और व्यापार पर भी सख्त टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने अपनी व्यापारिक नीतियों का बचाव करते हुए दावा किया कि केवल टैरिफ का प्रभावी इस्तेमाल करके उन्होंने अब तक दुनिया भर में आठ बड़े युद्धों और सैन्य संघर्षों को रोकने में सफलता पाई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब ईरान से निपटने को लेकर एक बहुत बड़ा निर्णय लेने का समय आ गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जो उन्हें फिर से खड़ा होने और एक महान देश बनने का मौका देगा, या फिर वे इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह से नष्ट कर दें ताकि वे दोबारा कभी तबाही न मचा सकें। उन्होंने कहा कि वे मानते हैं कि अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के साथ समझौता हो सकता है, लेकिन इन चुनावों का उनकी ईरान नीति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उनका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु शक्ति न बन सके।

श्री ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने या उसके बाद एक समझौते तक पहुंचने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद ईरान के साथ एक नया समझौता हो सकता है।

गाजा की स्थिति पर बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनकी सरकार के प्रयासों से गाजा में चल रहा युद्ध समाप्त हो गया है और सभी जीवित व मृत बंधकों को सफलतापूर्वक वापस ले आया गया है। यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन रूस और यूक्रेन दोनों देशों के नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहा है और यह संघर्ष उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से सुलझा लिया जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच 65 अरब बैरल तेल को लेकर इतिहास का सबसे बड़ा समझौता हुआ है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक अभूतपूर्व समझौते का उल्लेख किया, जिसके तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में दो बड़े सैन्य अड्डे बनाने की अनुमति मिली है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर निशाना साधते हुए श्री ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की आलोचना की और सदस्य देशों से इस संस्था को छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि 2026 में संयुक्त राष्ट्र के बजट में 15 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे नौकरशाही के 4,000 से अधिक पद समाप्त हुए हैं।

संबोधन के दौरान उन्होंने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को “विफल राष्ट्र” करार दिया और दावा किया कि वहां जल्द ही स्वतंत्रता आएगी, जिसके विरोध में क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने सभा का बहिष्कार किया।

अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने दुनिया भर के देशों से एकजुट होकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाने का आह्वान किया।

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