
उज्जैन। युवा शक्ति की ओर देखना है तो रामराज्य की ओर देखना होगा। भगवान राम के जीवन से युवाओं को साहस, संघर्ष और कर्तव्य की सीख लेनी चाहिए। वहीं मित्रता का पाठ भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता से पढ़ा जा सकता है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को गीता भवन सभागार में आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के समापन सत्र में कही। उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित इस आयोजन में देशभर से युवा शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने भगवान राम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों के कारण बाधा आने लगी तो उन्होंने महाराज दशरथ से राम और लक्ष्मण को साथ भेजने का आग्रह किया। दशरथ सेना भेजने और स्वयं जाने को तैयार थे, लेकिन विश्वामित्र का भरोसा युवा राम और लक्ष्मण पर था। उन्होंने कहा कि युवाओं में क्षमता और सामर्थ्य को पहचानकर उन्हें अवसर देना जरूरी है।
भगवान राम का कठिन जीवन
डॉ. यादव ने कहा कि भगवान राम के जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना धैर्य और साहस से किया। वनवास से लेकर सीता हरण के बाद रावण के विरुद्ध संघर्ष तक राम ने अपना मनोबल बनाए रखा। युवाओं को उनके चरित्र से यही सीख लेनी चाहिए कि सफलता का मार्ग चुनौतियों से होकर गुजरता है।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता से सीखने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने भगवान कृष्ण और राधा रानी का स्मरण करते हुए कहा कि जहां राधा हैं, वहां कृष्ण हैं। उन्होंने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम का उल्लेख करते हुए कृष्ण-सुदामा की मित्रता को युवाओं के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वही है जो संकट के समय साथ खड़ा रहे और मदद करते समय सामने वाले को अपमानित महसूस न होने दे।
महाभारत का उल्लेख
महाभारत के ध्रुपद और द्रोणाचार्य के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुकुल में दोनों मित्र थे, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं। सत्ता और पद मिलने के बाद मित्रता के रिश्ते में आया बदलाव आगे चलकर संघर्ष का कारण बना। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में मित्रता, कृतज्ञता और मानवीय संबंधों का सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
व्यवस्था में पारदर्शिता से पहुंच रहा लाभ
मुख्यमंत्री ने शासन व्यवस्था में पारदर्शिता का उदाहरण देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार से भेजे गए एक रुपए में से 15 पैसे ही आम आदमी तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि बाद के वर्षों में भी इस स्थिति को बदलने की आवश्यकता बनी रही। मुख्यमंत्री ने जनधन खातों और सीधे लाभ अंतरण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अब हितग्राहियों तक राशि सीधे पहुंचाने की व्यवस्था बनी है।
कृतज्ञता मनुष्यता का प्रमुख गुण
कार्यक्रम के अंत में मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि तीन दिनों तक देशभर से आए विद्वानों और युवाओं ने युवा धर्म संसद की शोभा बढ़ाई। उन्होंने कहा कि भगवान राम के चरित्र में कृतज्ञता मनुष्यता का प्रमुख गुण है। जो व्यक्ति कृतज्ञ हो सकता है, वही वास्तविक अर्थों में मनुष्य है। यात्रा में कठिनाई को सरल बनाने वाले व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारा धर्म है।
यह भी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में माधव कुमार, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष ओम जैन, महापौर मुकेश टटवाल, सिंहस्थ प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। तीन दिवसीय युवा धर्म संसद में धर्म, भारतीय संस्कृति, चरित्र निर्माण और युवाओं की भूमिका सहित विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ।
