भोपाल। इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले सुरक्षा को लेकर पुलिस और कांग्रेस के बीच तस्वीर साफ होती नजर नहीं आ रही है।
पुलिस ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए 31 शर्तें रखी हैं और इन शर्तों के संदर्भ में 1991 के राजीव गांधी हत्याकांड की जांच से जुड़ी वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया है।
अब कांग्रेस नेताओं से सवाल है—क्या ये सुरक्षा के जरूरी इंतजाम हैं या फिर इनका असर कार्यक्रम के आयोजन पर प्रशासनिक बाधा के तौर पर पड़ रहा है?
19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम होना है।
कार्यक्रम से पहले पुलिस ने आयोजकों को सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी 31 शर्तों की सूची सौंपी है।
इन शर्तों में 1500 स्वयंसेवकों की तैनाती, 6 प्रवेश और 8 निकास द्वार, 40 नाइट-विजन CCTV कैमरे, मेटल डिटेक्टर, मेडिकल और इमरजेंसी एग्जिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। लेकिन चर्चा का सबसे अहम बिंदु है—इन सुरक्षा निर्देशों के लिए पुलिस ने राजीव गांधी हत्याकांड के बाद बनी जस्टिस वर्मा आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है।
कांग्रेस के मुताबिक पुलिस ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की सुरक्षा शर्तों से जुड़े एक दस्तावेज में वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है, ‘वर्मा आयोग की रिपोर्ट में इवेंट आयोजकों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका का बहुत ही गहराई और विस्तार से विश्लेषण किया गया। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में हुई घटना में सुरक्षा व्यवस्था के ध्वस्त होने के पीछे आयोजकों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया सबसे बड़ा कारण था।’ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती बम विस्फोट में मौत हो गई थी। इस मामले में वर्मा आयोग के गठन का मुख्य मकसद घटना के पीछे की सुरक्षा चूकों की गहन जांच करना था।
